यह ख़बर 22 सितंबर, 2013 को प्रकाशित हुई थी

नीति निर्माताओं के लिए चिंता का कारण बनी महंगाई

खास बातें

  • भारतीय रिजर्व बैंक के नए गवर्नर रघुराम राजन से उम्मीद यह थी कि वह मौद्रिक नीति में नरमी लाकर विकास को बढ़ावा देंगे। उन्होंने हालांकि आम उम्मीद के विपरीत नीतिगत दर में वृद्धि कर दी।
नई दिल्ली:

भारतीय रिजर्व बैंक के नए गवर्नर रघुराम राजन से उम्मीद यह थी कि वह मौद्रिक नीति में नरमी लाकर विकास को बढ़ावा देंगे। उन्होंने हालांकि आम उम्मीद के विपरीत नीतिगत दर में वृद्धि कर दी।

राजन ने कहा कि स्थिति चिंताजनक है और नीतिगत तौर पर समुचित कदम नहीं उठाए जाने के कारण महंगाई दर पहले जताए गए स्तर से अधिक रह सकती है।

रिजर्व बैंक लगभग तीन साल से महंगाई के खिलाफ जंग लड़ रहा है, हालांकि उसे अधिक सफलता नहीं मिली है।

पूर्व गवर्नर डी. सुब्बाराव 2008 -09 के आर्थिक संकट के बाद से मौद्रिक नीति में सख्ती के रास्ते पर चल रहे थे, हालांकि इसका बुरा असर विकास दर पर पड़ा।

महंगाई दर पिछले साल की दूसरी छमाही से धीमे-धीमे घट रही थी और इस साल अप्रैल में यह पांच फीसदी से नीचे आ गई थी। तीन साल से कुछ अधिक समय में पहली बार महंगाई दर रिजर्व बैंक के सुविधाजनक स्तर से नीचे आई थी।

महंगाई दर मई और जून में पांच फीसदी के नीचे रही, लेकिन इसके बाद इसमें वृद्धि होनी शुरू हो गई और अगस्त में यह 6.1 फीसदी रही, जो छह माह का ऊपरी स्तर है। खाद्य महंगाई दर 18.18 फीसदी के साथ और भी चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई।

भारत में केपीएमजी के निदेशक कुंतल सुर ने कहा कि राजन भी सुब्बाराव के नक्शे कदम पर चल रहे हैं और महंगाई दर को साधने की कोशिश में लग गए हैं। सुर ने कहा, "आरबीआई की प्राथमिकता महंगाई को नियंत्रित करना हो गई है।" अधिकतर विश्लेषकों का यह अनुमान है कि आने वाले महीने में महंगाई दर और बढ़ेगी।

दुन एंड ब्रैडस्ट्रीट के वरिष्ठ अर्थशास्त्री अरुण सिंह ने कहा, "हमारा अनुमान है कि अक्टूबर में महंगाई सात फीसदी से अधिक हो जाएगी। उसके बाद ही यह उच्च स्तर पर रहेगी।"

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सिंह ने कहा कि महंगाई कम करने में आरबीआई को अधिक सफलता नहीं मिलेगी, क्योंकि अर्थव्यवस्था में संरचनागत समस्याओं के कारण महंगाई बढ़ रही है।