खास बातें
- वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि वैश्विक हालात के कारण भारत में मुद्रास्फीति का दबाव अभी और बना रहेगा।
मुंबई: वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि वैश्विक हालात के कारण भारत में मुद्रास्फीति का दबाव अभी और बना रहेगा। उन्होंने कहा कि दुनिया में कच्चे तेल और जिंसों की कीमत ऊंची बनी हुई है। मुखर्जी ने कहा, हमें बताया गया है कि जिंसों की कीमत का दबाव बना रहेगा क्योंकि कुछ जरूरी खाद्यान्न का उत्पादन कम हुआ है। वित्त मंत्री सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के मंच इंडियन बैंक्स एसोसिएशन की 63वीं वार्षिक सभा को संबोधित करने के बाद पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा, विश्व बाजार में अनिश्चितता हो, खासकर ऐसे उत्पादों के मामले में, जिनको लेकर हम आयात पर निर्भर करते हैं, तो उसका असर पड़ना स्वाभाविक है। वित्तमंत्री ने कहा, इस समय मुद्रास्फीति की दिशा को लेकर कोई भरोसा नहीं है। 2008 की तरह इस समय भी कोई निश्चितता के साथ यह नहीं कह सकता कि इसका व्यवहार कैसा होगा। उस समय तेल और जिंसो की कीमतें उछलने के बाद एकाएक नीचे आ गई थीं। साथ में उन्होंने कहा कि उनकी सरकार और रिजर्व बैंक आर्थिक वृद्धि की गति तेज करने तथा मुद्रास्फीति को स्वीकार्य स्तर पर नीचे लाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। मुखर्जी ने कहा कि रिजर्व बैंक के साथ तालमेल करके मांग और पूर्ति दोनों पक्ष से संबंधित नीतियों में समायोजन के माध्यम से हम उच्च आर्थिक वृद्धि और स्वीकार्य स्तर की मुद्रास्फीति के लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2011 में सामान्य मुद्रास्फीति की दर थोड़ा घटकर 8.66 प्रतिशत रही। इससे पूर्व के माह में मुद्रास्फीति 8.98 प्रतिशत थी। खाद्य वस्तुओं के थोक मूल्य पर आधारित खाद्य मुद्रास्फीति सात मई को समाप्त सप्ताह में 7.47 प्रतिशत थी, जो 18 माह का न्यूनतम दर है।