यह ख़बर 16 सितंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

रिजर्व बैंक के कदम से वाहन उद्योग को लगा झटका

खास बातें

  • उद्योग जगत का कहना है कि इससे मांग में और कमी आएगी और इस त्योहारी सीजन में ब्रिकी पर नकारात्मक असर होगा।
मुंबई:

देश के वाहन उद्योग को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत ब्याज दरों में की गई वृद्धि से बड़ा झटका लगा है। उद्योग जगत का कहना है कि इससे मांग में और कमी आएगी और इस त्योहारी सीजन में ब्रिकी पर नकारात्मक असर होगा। जनरल मोटर्स इंडिया के उपाध्यक्ष पी बालेंद्रन ने कहा, 'बाजार पहले ही गिरावट दिखा रहा है। इस नई वृद्धि से वाहन उद्योग पर और नकारात्मक असर होगा। त्योहारी सीजन में मांग कम होगी। इसकी अपेक्षा नहीं थी। रिजर्व बैंक को कम से कम इस बार तो छोड़ देना चाहिए था।' रिजर्व बैंक ने महंगाई को काबू में लाने के प्रयासों के तहत रेपो तथा रिवर्स रेपो दरों को चौथाई फीसदी बढ़ा दिया। इसका सीधा असर सभी तरह के कर्ज महंगे होने के रूप में सामने आएगा। बैंकों से मकान, दुकान और वाहनों के कर्ज पर ब्याज दरें बढ़ने से ईएमआई महंगी हो जाएगी। पिछले साल मार्च के बाद से यह 12वां मौका है जब रिजर्व बैंक ने लगातार रेपो और रिवर्स दरों में वृद्धि की है। कंपनी द्वारा कीमतें बढ़ाए जाने की संभावना के सवाल पर बालेंद्रन ने कहा, 'हमने अभी इस बारे में कोई फैसला नहीं किया है।' फिएट इंडिया को भी लगता है कि रिजर्व बैंक के इस कदम का गंभीर असर वाहन उद्योग पर होगा। फिएट इंडिया के अध्यक्ष राजीव कपूर ने कहा, 'उद्योग पहले ही भारी दबाव में है और केंद्रीय बैंक के इस नए कदम से हालात और खराब होंगे। त्योहारी ब्रिकी घटने वाली है।' अतुल ऑटो के निदेशक विजय केडिया ने कहा, 'निश्चित रूप से, इसका असर उद्योग पर होगा। बढ़ती लागत तथा ईंधन कीमतों के कारण वाहन उद्योग तो पहले ही दबाव में है।' पुणे की फोर्स मोटर्स ने भी चिंता जताई है। कंपनी के अध्यक्ष (निजी वाहन शाखा) संजीव गर्ग ने कहा, 'निश्चित रूप से इसका नकारात्मक असर ब्रिकी पर होगा।'


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