मनमोहन सिंह की फाइल तस्वीर
नई दिल्ली:
योजना आयोग में अपने विदाई संबोधन में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बुधवार को कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति का कार्य जारी है और इस दिशा में अभी काफी लंबा रास्ता तय किया जाना बाकी है।
मनमोहन सिंह ने योजना आयोग के सदस्यों के साथ अपनी आखिरी बैठक में कहा, भारत की विकास की कहानी का कार्य प्रगति पर है... लेकिन इस दिशा में अभी काफी लंबा रास्ता तय किया जाना बाकी है। मनमोहन सिंह आयोग के अध्यक्ष हैं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि योजना आयोग को वैश्वीकरण के नए दौर में अपने को सार्थक बनाए रखने के लिए नए रूप में ढालना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने आयोग के साथ अपने लंबे जुड़ाव को याद करते हुए कहा, अर्थव्यवस्था लगातार अधिक खुली और उदारीकृत हो रही है तथा बाजार तंत्र पर निर्भरता उत्तरोतर बढ़ रही है, ऐसे में योजना आयोग सोचना होगा कि इस नई दुनिया में उसकी भूमिका क्या होनी चाहिए।
यूपीए के 10 वर्ष के शासनकाल के दौरान आयोग के कामकाज पर संतोष व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि योजना आयोग अपने को आलोचनात्मक समीक्षा के लिए प्रस्तुत करेगा और सरकार की नीतिगत चर्चाओं तथा हमारे देश के विकास में अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा। मनमोहन ने बैठक में कहा कि बदलते आर्थिक परिवेश में आयोग को समस्याओं और चुनौतियों के प्रति अपने दृष्टिकोण का मूल्यांकन करना चाहिए।
उन्होंने बैठक में कुछ मुद्दे उठाते हुए कहा, हमें यह देखना होगा कि क्या हम अभी वही उपकरण और दृष्टिकोण अपनाए हुए हैं, जो दूसरे जमाने के लिए डिजाइन किए गए थे? क्या हमने आयोग की परंपरागत गतिविधियों का पुनर्गठन किए बिना ही उसमें नए काम जोड़ दिए और नई परतें चढ़ा दी हैं।
प्रधानमंत्री योजना आयोग से पहली बार अप्रैल 1980 में सदस्य सचिव के रूप में जुड़े थे। राजीव गांधी की सरकार के समय वह आयोग के उपाध्यक्ष थे। सिहं ने वर्ष 1991 से 1996 के बीच वित्त मंत्री के तौर पर अपने दिनों को याद करते हुए कहा कि तब उन्हें योजना आयोग के तत्कालीन उपाध्यक्ष और वर्तमान में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का 'भरपूर सहयोग' मिला था।