यह ख़बर 04 मई, 2013 को प्रकाशित हुई थी

भारत ने एडीबी के वित्तीय संसाधन बढ़ाने का किया आह्वान

खास बातें

  • भारत ने शुक्रवार को निर्धन देशों में गरीबी घटाने और बुनियादी ढांचों के विकास के वास्ते एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के वित्तीय संसाधनों के आधार स्रोतों में विस्तार करने की जोरदार वकालत की।
ग्रेटर नोएडा:

भारत ने शुक्रवार को निर्धन देशों में गरीबी घटाने और बुनियादी ढांचों के विकास के वास्ते एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के वित्तीय संसाधनों के आधार स्रोतों में विस्तार करने की जोरदार वकालत की।

एडीबी बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की सलाना बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि एडीबी जैसी बहुपक्षीय एजेंसी को अधिक वित्तीय संसाधनों की दरकार है, ताकि वह विकासशील देशों को उनकी विकास संभावनों की पूर्ति में मददगार साबित हो सके।

प्रधानमंत्री ने वार्षिक बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा, "हमने यूरोप में संकट के जवाब में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के स्रोतों में विस्तार किया है। अब हमें बहुपक्षीय विकास बैकों के आधार स्रोतों में विस्तार करने की जरूरत है, ताकि इनमें विकासशील देशों की विकास संभावनाओं की पूर्ति करने की सामर्थ्य बनी रहे।"

मनमोहन सिंह ने मनीला आधारित एडीबी को संसाधनों को बढ़ाने के लिए नए तरीकों को अपनाने का सलाह दिया। उन्होंने कहा, "मुझे पता है कि एडीबी के ऋणों के वहनीय स्तर में गिरावट का अनुमान लगाया गया है। इस मोड़ पर एडीबी को एशिया प्रशांत क्षेत्र में बुनियादी परियोजनाओं में वैश्विक बचत के लिए नए तरीकों की तलाश करना चाहिए।"

वित्त मंत्री पी. चिदम्बरम ने भी सदस्य देशों से बहुपक्षीय एजेंसी को सहायता में बढ़ोतरी का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "साथी गर्वनरों, मैं आपसे एडीबी के संसाधनों में बढ़ोतरी के लिए साधनों और तरीकों पर विचार करने के लिए अपील करता हूं, ताकि एशिया के बुनियादी ढांचों, आर्थिक वृद्धि और गरीबी कम करने की जरूरतों को पूरा किया जा सके।"

चिदम्बरम ने संकेत दिया कि अगले दशक में एशिया में बुनियादी ढांचों में निवेश के लिए 8-10 खरब डॉलर मुद्रा की जरूरत होगी।

भारत में 12वीं पंचवर्षीय योजना (2012-17) के दौरान बुनियादी ढांचों में 1 खरब डॉलर निवेश का अनुमान किया गया है। इसका आधा हिस्सा निजी क्षेत्र से आएगा।

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चिदम्बरम ने कहा, "एडीबी के 'ऋणों के वहनीय स्तर' में 10.1 अरब डॉलर से फिसलकर 8.0 अरब डॉलर हो जाने की उम्मीद है।" उन्होंने कहा, "एडीबी की वित्तीय स्थिति फिलहाल ठीक है, लेकिन यह विवश है। मौजूदा निम्न ब्याज दरों के कारण निवेशित आय से आमदनी कम हो रही है। इसने बैंक को मिलने वाली राशि को सीमित कर दिया है। मैं चिंतित हूं कि निम्न ब्याज दर का माहौल कुछ और समय तक जारी रहेगा।"