यह ख़बर 09 जनवरी, 2011 को प्रकाशित हुई थी

भारत की नजर प्रवासियों के धन पर नहीं : मोंटेक

खास बातें

  • अहलूवालिया ने कहा, देश में 95 प्रतिशत निवेश घरेलू स्रोतों से आता है। यदि आपको लगता है कि आपके पैसे का यहां बेहतर इस्तेमाल होगा, तो आपका स्वागत है।'
New Delhi:

योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने रविवार को इस धारणा को पूरी तरह खारिज कर दिया कि भारत की निगाह केवल प्रवासी भारतीयों :एनआरआई: के धन पर रहती है। उन्होंने कहा कि प्रवासी भारतीय दुनिया में कहीं भी निवेश कर सकते हैं। सरकार द्वारा उद्योग मंडल सीआईआई के सहयोग से आयोजित प्रवासी भारतीय दिवस समारोह को संबोधित करते हुए योजना आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा, मुझे लगता है कि हमें इस धारणा को छोड़ना होगा कि हम प्रवासी भारतीयों के साथ संपर्क सिर्फ निवेश के लिए कर रहे हैं। हम एनआरआई से केवल धन के लिए संपर्क नहीं कर रहे हैं। अहलूवालिया ने कहा, देश में 95 प्रतिशत निवेश घरेलू स्रोतों से आता है। यदि आपको लगता है कि आपके पैसे का यहां बेहतर इस्तेमाल होगा, तो आपका स्वागत है। यदि आपको लगता है कि दूसरे देश में निवेश बेहतर रहेगा, तो एक अर्थशास्त्री के रूप में मैं कहूंगा कि आप वही करें, जो आप करना चाहते हैं। प्रवासी भारतीय मामलों के मंत्री व्यालार रवि ने कहा, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में एनआरआई हिस्सेदारी मात्र 1.3 फीसद की है। हालांकि देश में एनआरआई का निवेश बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन प्रवासी भारतीयों द्वारा देश में भेजा जाने वाला धन यानी रेमिटेंस काफी अधिक बैठता है। 2008-09 से देश में प्रवासी भारतीयों द्वारा 46.9 अरब डालर की राशि भेजी गई है। अहलूवालिया ने स्पष्ट किया कि हम प्रवासी भारतीयों के पास इसलिए जा रहे हैं कि क्योंकि हम लंबे समय से चले आ रहे सामाजिक सांस्कृतिक रिश्तों में बंधे हुए हैं। उन्होंने कहा, ईमानदारी से मैं यही कहूंगा कि यदि आपको लगता है कि आपको भारत में निवेश नहीं करना चाहिए, तो इसके लिए शर्मिंदा होने की जरूरत नहीं है। हमारा काम निवेशकों को बुलाना है। चाहे भारतीय निवेशक हो या विदेशी इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।


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