यह ख़बर 20 जून, 2012 को प्रकाशित हुई थी

आईएमएफ कोष में 10 अरब की राशि अभी नहीं देगा भारत

खास बातें

  • भारत वैश्विक आर्थिक स्थिति में सुधार होने पर, ऋण संकट में फंसे यूरो क्षेत्र की मदद के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को दी जाने वाली 10 अरब डॉलर की राशि शायद न दे।
लॉस काबोस:

भारत वैश्विक आर्थिक स्थिति में सुधार होने पर, ऋण संकट में फंसे यूरो क्षेत्र की मदद के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को दी जाने वाली 10 अरब डॉलर (55,000 करोड़ रुपये) की राशि शायद न दे।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बयान में कहा, ‘‘हमने जो राशि देने की बात कही है, वह पूरी तरह नकद रूप में है। अर्थात अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने मदद देने वाले देशों को आश्वस्त किया है कि जब कभी जरूरत पड़ेगी, कोष उपलब्ध होगा। इसीलिए यह हमारे भंडार का हिस्सा है।’’ अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि स्थिति अभी ऐसी नहीं आई है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जी-20 शिखर सम्मेलन में 10 अरब डॉलर के योगदान को लेकर जो प्रतिबद्धता जताई उसे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को हस्तांरित किया जाए।

आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव आर गोपालन ने कहा, ‘‘यह योगदान हमारे मुद्राभंडार से जुड़ा है। यदि वैश्विक स्थिति बेहतर होती है तो भारत यह राशि शायद न दे।’’

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गोपालन ने कहा, ‘‘भारत का 10 अरब डॉलर का योगदान ब्रिक्स देशों द्वारा आईएमएफ को दी जाने वाली 75 अरब डॉलर की मदद का हिस्सा है। ब्रिक्स देशों ने आईएमएफ को दी जाने वाली अतिरिक्त 430 अरब डॉलर राशि में 75 अरब डॉलर का योगदान करने की बात कही है। इसके जरिए वित्तीय बाजारों को संदेश देना है कि जरूरी संसाधन उपलब्ध हैं। साथ ही बाजार में विश्वास और शांति को बहाल करना है।’’ सिंह ने मंगलवार को कहा था कि यूरो क्षेत्र को ऋण संकट से उबारने के लिए आईएमएफ की 430 अरब डॉलर की मदद राशि में भारत ने 10 अरब डॉलर का योगदान करने का निर्णय किया है। सिंह ने कहा कि आईएमएफ के प्रोत्साहन पैकेज में भारत का योगदान वैश्विक समुद्राय में जिम्मेदार देश की हमारी पहचान को प्रतिबिंबित करता है। हमें निश्चित रूप से अपनी भूमिका निभानी है।