यह ख़बर 20 मई, 2013 को प्रकाशित हुई थी

भारत, चीन ने व्यापार घाटा कम करने के लिए किए समझौते

खास बातें

  • बढ़ते व्यापार घाटे को कम करने के मकसद से भारत ने चीन के साथ सोमवार को चार समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे भारत से भैंस का मांस, मछली और औषधियों के निर्यात में तेजी आएगी।
नई दिल्ली:

बढ़ते व्यापार घाटे को कम करने के मकसद से भारत ने चीन के साथ सोमवार को चार समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे भारत से भैंस का मांस, मछली और औषधियों के निर्यात में तेजी आएगी। गत कारोबारी साल में देश का व्यापार घाटा बढ़कर 40.77 अरब डॉलर हो गया है।

तीन सहमति पत्र (एमओयू) भैंस के मांस, मछली और औषधियों के व्यापार को बढ़ावा देने से सम्बंधित है। चौथे का सम्बंध चारे और चारा सम्बंधी अवयवों के व्यापार को आसान करने से सम्बंधित है।

इन समझौतों पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और चीनी प्रधानमंत्री ली केकियांग की मौजूदगी में सम्बंधित अधिकारियों ने हस्ताक्षर किए।

समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद वाणिज्य और उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि इन समझौतों से व्यापार घाटा कम करने में मदद मिलेगी।

शर्मा ने एक बयान में कहा, "एमओयू पर हस्ताक्षर उन मुद्दों पर एक अच्छी शुरुआत है, जो भारत के चीन के सामने समय-समय पर उठाता रहा है।"

वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 2012-13 में बढ़कर 40.77 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो 2001-02 में 1.08 अरब डॉलर था।

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द्विपक्षीय व्यापार 2012-13 में बढ़कर 67.83 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो 2001-02 में 2.09 अरब डॉलर था। 2011-12 में चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन गया था और तब दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़कर 75.59 अरब डॉलर हो गया था।