खास बातें
- आईएमएफ प्रमुख कान की गिरफ्तारी, इसके लोकतांत्रिकीकरण की मांग कर रहे भारत जैसे विकासशील देशों के लिए ईंधन का काम कर सकती है।
वाशिंगटन: होटल कर्मचारी से दुष्कर्म के कथित प्रयास के मामले में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के प्रमुख डोमिनिक स्ट्रॉस कान की गिरफ्तारी, इसके लोकतांत्रिकीकरण की मांग कर रहे भारत, ब्राजील और चीन जैसे विकासशील देशों के लिए ईंधन का काम कर सकती है। 'टाइम' पत्रिका के मुताबिक मुद्रा कोष के पूर्व अधिकारी ईश्वर प्रसाद ने कहा, "इस घटना के बाद आईएमएफ में नेतृत्व और प्रशासनिक संरचना का मुद्दा नाटकीय और अप्रत्याशित रूप से गर्मा सकता है।" उन्होंने कहा, "विकासशील देश ब्राजील, भारत और चीन दबाव बना सकते हैं, इन देशों का मानना है कि मुद्रा कोष के नेतृत्व और विचारों में अभी भी अमेरिका और यूरोपीय संस्थापकों का प्रभुत्व है।" हाल में हुई गिरफ्तारी की घटना से विकासशील देशों की इस मांग को बढ़ावा मिल सकता है कि आईएमएफ और इसकी सहयोगी संस्थाओं के प्रमुख पदों पर अमेरिकी और यूरोपीय प्रतिनिधियों की नियुक्ति की परम्परा समाप्त होनी चाहिए। आईएमएफ और विश्वबैंक को उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) का आर्थिक समकक्ष बताते हुए उन्होंने कहा यह अतीत की विषमताओं का दोहराव है। पत्रिका ने लिखा कि आईएमएफ वास्तव में ज्यादा योग्यता आधारित प्रबंधन की ओर बढ़ रहा था लेकिन स्ट्रॉस कान की इस तरह अचानक लगभग वापसी और निंदाजनक घटनाक्रम के कारण इस पद पर गैर यूरोपीय व्यक्ति को पदस्थ किए जाने की संभावना को बढ़ावा मिल सकता है। यदि ऐसा हुआ तो ज्यादा संभावना इस बात की है कि आईएमएफ का प्रमुख दक्षिण अमेरिकी देश के बजाय एशिया का होगा। वहीं समाचार पत्र 'वाशिंगटन पोस्ट' ने लिखा कि विश्व अर्थव्यवस्था को अपना दमखम दिखाते हुए विकासशील देशों ने यूरोप को उसके परंपरागत आईएमएफ प्रमुख के पद से वंचित करने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि स्ट्रॉस कान की गिरफ्तारी के बाद इस पद का उत्तराधिकारी योग्यता के आधार पर चुना जाना चाहिए न कि क्षेत्र के आधार पर।