यदि जेब पर भारी पड़ने लगेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम तो सरकार उठा सकती है यह कदम

यदि जेब पर भारी पड़ने लगेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम तो सरकार उठा सकती है यह कदम

सरकार का कहना है कि पेट्रोल-डीजल पर अब फिर से सब्सिडी हरगिज नहीं दी जा सकती (फाइल फोटो)

खास बातें

  • दिसंबर से अब तक पेट्रोल के दाम में 5.21 रुपये की बढ़ोतरी
  • डीजल की कीमत इस दौरान 4.45 रुपये प्रति लीटर बढ़ गई
  • सरकार ने कहा- कीमतें ज्यादा बढ़ने पर उत्पाद शुल्क में कटौती संभव
नई दिल्ली:

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बाद दिसंबर से अब तक पेट्रोल के दाम में 5.21 रुपये और डीजल के मूल्य में 4.45 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हो चुकी है.

पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ने के बीच सरकार ने कहा है कि यदि इनके दाम काफी बढ़ जाते हैं और उपभोक्ताओं की जेब पर भारी पड़ने लगेंगे, तो उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में कटौती की जा सकती है.

हालांकि सरकार ने यह साफ कर दिया है कि सरकार पेट्रोल और डीजल पर पहले की तरह फिर से सब्सिडी हरगिज नहीं देगी. प्रधान ने कहा, सब्सिडी गरीबों के खिलाफ है. सब्सिडी केवल जरूरतमंद लोगों को दी जानी चाहिए, उन लोगों को नहीं जो इसे वहन कर सकते हैं.

प्रधान ने कहा कि ऑटो ईंधन का इस्तेमाल ज्यादातर उन लोगों द्वारा किया जाता है, जो इसे वहन कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि पेट्रोल के दाम जून, 2010 में नियंत्रण मुक्त कर दिए गए थे. डीजल के दाम भी अक्टूबर, 2014 में बाजार के हवाले कर दिए गए थे और यही व्यवस्था आगे भी जारी रहेगी.

उल्लेखनीय है कि रविवार को छह सप्ताह में चौथी बार पेट्रोल और एक पखवाड़े में दूसरी बार डीजल के मूल्य में इजाफा किया गया और पेट्रोल के दाम में प्रति लीटर 42 पैसे और डीजल के मूल्य में प्रति लीटर 1.03 रुपये की बढ़ोतरी की गई.
(इनपुट भाषा से)


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