भारत में निवेश, लेकिन रिटायरमेंट के बाद घर हो विदेश में- सर्वे में सामने आया क्या चाहते हैं प्रवासी भारतीय

विदेशी बैंक HSBC के एक सर्वे में सामने आया है कि प्रवासी भारतीयों में से ज्यादातर भारत में निवेश करना चाहते हैं. हालांकि, इसके साथ ही रिटायरमेंट के बाद वे जीवन की बेहतर गुणवत्ता के लिए अपने मौजूदा निवास वाले देश में ही बसना चाहते हैं.

भारत में निवेश, लेकिन रिटायरमेंट के बाद घर हो विदेश में- सर्वे में सामने आया क्या चाहते हैं प्रवासी भारतीय

Investment Planning : प्रवासी भारतीयों को लेकर सर्वे. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मुंबई:

प्रवासी भारतीयों में से ज्यादातर भारत में निवेश करना चाहते हैं. हालांकि, इसके साथ ही रिटायरमेंट के बाद वे जीवन की बेहतर गुणवत्ता के लिए अपने मौजूदा निवास वाले देश में ही बसना चाहते हैं. एक सर्वेक्षण में बृहस्पतिवार को यह निष्कर्ष निकाला गया है. विदेशी बैंक HSBC द्वारा यह सर्वे किया गया है. इसमें दूसरे देशों में रहने वाले भारतीय मूल के 4,152 लोगों के विचार लिए गए हैं. सर्वे में शामिल 80 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे भारत में निवेश कर रहे हैं, जबकि 59 प्रतिशत अगले तीन साल में भारत में अपना निवेश बढ़ा सकते हैं.

सर्वे में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी की वजह से पिछले तीन साल के दौरान अल्पांश प्रवासी भारतीयों ने देश में अपना निवेश कम किया है. सर्वे में शामिल लोगों ने कहा कि उनके मित्र और परिवार भारत में रहते हैं, जो उनके लिए यहां निवेश करने की सबसे बड़ी प्रेरणा है. हालांकि, जब रिटायरमेंट के बाद बसने की बात आती है, तो सर्वेक्षण में शामिल 71 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे अपने निवास के देश में रहना पसंद करेंगे और भारत नहीं आना चाहेंगे.

सर्वे में कहा गया है कि ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, मलेशिया और अमेरिका के प्रवासी भारतीयों के सेवानिवृत्ति के बाद अपने निवास वाले देश में बसने की अधिक संभावना है. वहीं हांगकांग, सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के प्रवासियों के लिए यह संभावना कम है.

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अर्थव्यवस्था पटरी पर

अगर इसी बहाने भारत के अर्थव्यस्था की बात करें तो कोविड-19 की दो लहरों के बाद यह तेजी से वापस पटरी पर लौट रही है. वहीं, सरकारी अधिकारी मौजूदा वित्त वर्ष में GDP के 10% की दर से बढ़ने की संभावना जता रहे हैं. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के अध्यक्ष बिबेक देबरॉय ने बीते बुधवार को कहा था कि भारत की अर्थव्यवस्था उच्च विकास पथ की ओर बढ़ रही है और वित्त वर्ष 2021-22 में इसके लगभग 10 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना है.

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देबरॉय ने एसबीआई के एक कार्यक्रम में कहा, ‘मुझे विश्वास है कि हम एक उच्च विकास दर, उच्च गरीबी उन्मूलन दर, उच्च रोजगार दर के साथ एक समृद्ध, अधिक विकसित और बेहतर शासित भारत की ओर अग्रसर हैं. मुझे लगता है कि इस साल (वित्त वर्ष 2022) विकास की वास्तविक दर लगभग 10 प्रतिशत रहने वाली है.' वित्त वर्ष 2021-22 की शुरुआत में वास्तविक वृद्धि का अनुमान 8.5-12.5 प्रतिशत के बीच था.



(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)