यह ख़बर 01 जून, 2012 को प्रकाशित हुई थी

रुपये में आती गिरावट को थामना मुश्किल : रिजर्व बैंक

खास बातें

  • रिजर्व बैंक के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि रुपये में गिरावट यदि बुनियादी कारकों की कमजोरी अथवा वैश्विक कारणों से आ रही है तो वह इसे नहीं रोक सकता।
मुंबई:

रिजर्व बैंक के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि रुपये में गिरावट यदि बुनियादी कारकों की कमजोरी अथवा वैश्विक कारणों से आ रही है तो वह इसे नहीं रोक सकता। बैंक ऐसे हालात में विदेशी मुद्रा बाजार में केवल नपे-तुले कदम ही उठा सकता है।

आरबीआई के डिप्टी गवर्नर केसी चक्रवर्ती ने सरकारी बैंकों के एक सम्मेलन में कहा, ‘यदि रुपये में गिरावट अर्थव्यवस्था के बुनियादी कारकों में कमजोरी या वैश्विक कारणों से आ रही है तो रिजर्व बैंक इसे नहीं रोक सकता।’ उन्होंने कहा कि यदि रुपया मूलभूत स्थिति में कमजोरी के कारण गिर रहा है तो सरकार को व्यापार घाटे पर जरूर ध्यान देना चाहिए।

चक्रवर्ती ने कहा, ‘यदि रुपया वास्तविक समस्याओं के कारण गिर रहा है तो ऐसे में वित्तीय क्षेत्र की पहलों से इसका समाधान नहीं होगा।’

अप्रैल से सभी प्रमुख मुद्राएं विशेष तौर पर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये का मूल्य गिर रहा है और गुरुवार को 56.52 के निम्नतम स्तर पर पहुंच गया। अब तक सालाना स्तर पर इसमें 24 फीसद की गिरावट आ चुकी है।

डॉलर की मांग रोकने और रुपये को समर्थन देने के लिए चक्रवर्ती ने तेल कंपनियों के लिए अलग व्यवस्था का भी संकेत दिया। उन्होंने कहा, ‘तेल कंपनियों के लिए एक अलग डॉलर खिड़की खोलने का विकल्प खुला है। आरबीआई ऐसा करेगा या नहीं मुझे नहीं पता क्योंकि ऐसा सार्वजनिक रूप से नहीं किया जाएगा।’

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अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और घटते विदेशी मुद्रा-भंडार के बीच आरबीआई के हाथ बंधे होने के मद्देनजर तेल कंपनियों को अलग खिड़की खोलकर अलग से डॉलर बेचने की चर्चा हुई थी। तेल कंपनियां डॉलर की सबसे अधिक खपत करती हैं। इससे खुले बाजार में डॉलर की मांग का दबाव कम होगा।