खास बातें
- गोल्डमैन साक्स के अर्थशास्त्री तुषार पोद्दार ने कहा कि वास्तविक वृद्धि अर्थव्यवस्था की मौजूदा क्षमता से कम रही है इस लिहाज से अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति पर गिरावट का दबाव बना हुआ है।
नई दिल्ली: विश्लेषकों का कहना है कि आर्थिक वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ने तथा मुद्रास्फीति के नरम होने के साथ रिजर्व बैंक इस महीने जारी होने वाली मध्य तिमाही समीक्षा में नीतिगत ब्याज दरों में वृद्धि पर रोक लगा सकता है। गोल्डमैन साक्स के अर्थशास्त्री तुषार पोद्दार ने कहा कि वास्तविक वृद्धि अर्थव्यवस्था की मौजूदा क्षमता से कम रही है इस लिहाज से अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति पर गिरावट का दबाव बना हुआ है। उन्होंने कहा, हम उम्मीद करते हैं कि मुद्रास्फीति मार्च 2012 तक 6 प्रतिशत के स्तर पर आ जाएगी। इसे देखते हुए हमें लगता है कि भारतीय रिजर्व बैंक नकदी पर दबाव कम करेगा। इसके लिये वह पहले खुले बाजार में कदम उठायेगा और उसके बाद बैंकों उसके पास रखी जाने वाली नकदी जरूरतों में कटौती करेगा। देश की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 6.9 प्रतिशत रही जो इससे पूर्व वित्त वर्ष की इसी तिमाही में 8.4 प्रतिशत थी। विनिर्माण, कृषि तथा खनन क्षेत्र के खराब प्रदर्शन के कारण वृद्धि दर में गिरावट आयी है। पोद्दार ने कहा कि रिजर्व बैंक 2012 में ब्याज दरों में एक प्रतिशत की कटौती कर सकता है। उन्होंने कहा कि आर्थिक वृद्धि में नरमी तथा मुद्रास्फीति की प्रवृत्ति खासकर वैश्विक स्थिति को देखते हुए नीतिगत दरों में कमी उपयुक्त कदम हो सकता है। बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच इंडिया के अर्थशास्त्री इंद्रनील सेन गुप्ता ने कहा, वृद्धि में नरमी तथा मुद्रास्फीति में नरमी को देखते हुए रिजर्व बैंक ने अंतत: खुले बाजार की कार्यवाही शुरू की जो हमारे लिये राहत की बात है। मुद्रा बाजार में नकदी की कमी तथा ब्याज दर पर अनुचित दबाव के कारण शीर्ष बैंक ने यह कदम उठाया है। मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के लिये रिजर्व बैंक मार्च 2010 के बाद से 13 बार नीतिगत दरों में वृद्धि कर चुका है। मुद्रास्फीति पिछले वर्ष दिसंबर से 9 प्रतिशत के ऊपर बनी हुई है।