मुंबई: अगर बहुप्रतीक्षित ग्रीस संकट को लेकर समझौता फेल होता है तो रिजर्व बैंक को रुपये को डॉलर के मुकाबले 65 रुपये के स्तर पर रोकने के लिए 15 अरब डॉलर बाजार में झोंकने पड़ सकते हैं। यह बात एक रिपोर्ट में कही गई है। संकट से जूझ रही यूनान की सरकार को कर्ज चुकाने में चूक से बचने के लिए यूरोपीय संघ और अन्य वैश्विक कर्जदाताओं के साथ समझौता करना होगा।
बैंक ऑफ अमेरिका मैरिल लिंच ने एक रिपोर्ट में कहा, 'हमें लगता है कि यूरोपीय संघ के प्रमुखों की आपात बैठक समझौते के लिए आखिरी मौका है।' रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर यूनान 30 जून को अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) और 20 जुलाई को यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) के कर्ज की किश्त नहीं चुका पाता तो भी वह यूरो प्रणाली में बना रह सकता है, भले ही उसे ईसीबी से आपात ऋण की सुविधा बंद हो जाए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर यूनान की विफलता की स्थिति में रूपए की प्रतिक्रिया तीव्र रही तो वह समानांतर तौर पर रुपये का झटका लगने देगा और 66 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर ही हस्तक्षेप करेगा।
बैंक को उम्मीद है कि रिजर्व बैंक विनियम दर की तितरफा रणनीति अपनाएगा- आरबीआई 60-62 के स्तर पर विदेशी मुद्रा खरीदेगा, 63-64 पर प्रतिरोध होगा ओर 65 के स्तर को थामने के लिए वह 15 अरब अमेरिकी डॉलर की बिक्री करेगा।