खास बातें
- भारत में कंपनियों में उच्च स्तर पर लगे बैंक ऋण डूबने की आशंकाओं को खारिज करते हुए दिग्गज बैंकर चंदा कोचर ने कहा कि ज्यादातर ऋण निवेश चरण में परियोजनाओं के लिए दिए गए हैं और कंपनियों में नकदी का सृजन शुरू होने के साथ ऋण का पुनर्भुगतान शुरू हो जाएगा।
दावोस: भारत में कंपनियों में उच्च स्तर पर लगे बैंक ऋण डूबने की आशंकाओं को खारिज करते हुए दिग्गज बैंकर चंदा कोचर ने कहा कि ज्यादातर ऋण निवेश चरण में परियोजनाओं के लिए दिए गए हैं और कंपनियों में नकदी का सृजन शुरू होने के साथ ऋण का पुनर्भुगतान शुरू हो जाएगा।
देश में निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक आईसीआईसीआई बैंक की प्रबंध निदेशक व सीईओ कोचर ने यह भी कहा कि बैंकिंग समेत वित्तीय सेवा क्षेत्र में अगले कुछ सालों के दौरान विकास की जबरदस्त संभावनाएं हैं। विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक के दौरान एक भेंटवार्ता में उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था और भारतीय कंपनियों द्वारा विदेश में विस्तार गतिविधि के जरिए वैश्विक संपर्क में जबरदस्त अवसर पैदा होंगे।
उन्होंने कहा, कंपनियों के कुछ खंड में अधिक ऋण को लेकर चिंता है, लेकिन ऋण के स्तर को इस तथ्र्य के संदर्भ में देखा जाना चाहिए कि कई कंपनियां निवेश करने के चरण में हैं। उन्होंने कहा कि कंपनियों को दिया गया कर्ज तभी तक उच्च स्तर का नजर आता है, जब तक निवेश पूरा नहीं हो जाता और नकदी का सृजन होना शुरू नहीं हो जाता। जैसे ही परियोजना से नकदी का सृजन शुरू होता है, ऋण का स्तर आने वाले समय में घटना चाहिए।