यह ख़बर 20 दिसंबर, 2012 को प्रकाशित हुई थी

सरकार ने भी माना, देश में अमीर-गरीब की खाई बढ़ी

खास बातें

  • सरकार ने गुरुवार को संसद में बताया कि 2004-05 से 2009-10 के बीच देश में उपभोक्ता खर्च और आय, दोनों मानदंडों पर अमीर और गरीब के बीच की खाई थोड़ा बढ़ी है।
नई दिल्ली:

सरकार ने गुरुवार को संसद में बताया कि 2004-05 से 2009-10 के बीच देश में उपभोक्ता खर्च और आय, दोनों ही मानदंडों पर अमीर-गरीब के बीच खाई थोड़ा बढ़ी है। यह अंतर गांव और शहर दोनों जगह बढ़ा है।

संसदीय मामले और योजना राज्यमंत्री राजीव शुक्ला ने एक लिखित उत्तर में कहा कि राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) द्वारा एकत्र किए गए परिवार उपभोक्ता व्यय सम्बंधी आंकड़ों के आधार पर गिनी गुनांक के रूप में असमानता ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष 2004-05 के 0.27 से बढ़कर वर्ष 2009-10 में 0.28 हो गई है जबकि शहरी क्षेत्र में इस दौरान 0.35 से बढ़कर 0.37 हो गई।

वह इस सवाल का जवाब दे रहे थे कि क्या देश में असमानता बढ़ी है। मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय अनुभव दर्शाते हैं कि विकास के आरंभिक चरण में विषमता बढ़ती है।

उन्होंने कहा कि बेहतर आर्थिक बुनियाद, हाल में भारत ने जो उच्च आर्थिक वृद्धिदर को देखा है, उसने जनसमुदाय विशेषकर गरीबों और सीमांत लोगों के जीवनस्तर की गुणवत्ता पर निर्णायक प्रभाव डालने की क्षमता को बढ़ाया है।

ग्यारहवीं योजना के दौरान भी अधिकांश राज्यों ने टिकाउ उच्च वृद्धि दर को देखा है जिसमें वे कमजोर राज्य भी शामिल हैं जिनकी वृद्धि दर में सुधार हुआ है।

उन्होंने कहा कि इन राज्यों में बिहार, ओड़िशा, असम, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और कुछ हद तक उत्तर प्रदेश भी शामिल हैं।

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उपलब्ध आंकड़ों का हवाला देते हुए मंत्री ने कहा कि किसी भी राज्य ने 11वीं योजनावधि के दौरान छह प्रतिशत से कम की वृद्धि हासिल नहीं की।