यह ख़बर 09 दिसंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पाना आसान नहीं : सरकार

खास बातें

  • केंद्र ने कहा कि निवेश के मोर्चे पर अनिश्चितता और सब्सिडी में वृद्धि के मद्देनजर राजकोषीय घाटे को 4.6% पर सीमित रखने के लक्ष्य को पाना मुश्किल है।
New Delhi:

केंद्र ने कहा कि निवेश के मोर्चे पर अनिश्चितता और सब्सिडी में वृद्धि के मद्देनजर 2011-12 में राजकोषीय घाटे को 4.6 प्रतिशत पर सीमित रखने के लक्ष्य को पाना मुश्किल है। हालांकि इसके साथ ही सरकार ने कहा है कि यह लक्ष्य मामूली अंतर से ही हासिल नहीं हो पाएगा। संसद में पेश छमाही समीक्षा में कहा गया है, निवेश के मामले में अनिश्चितता और सब्सिडी की ऊंची जरूरत के मद्देनजर 2011-12 में राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को पाना काफी चुनौतीपूर्ण है। समीक्षा में कहा गया है कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि इस साल यह लक्ष्य आसान नहीं होगा। हालांकि, सरकार राजकोषीय घाटे को 4.6 प्रतिशत से ऊपर कम से कम पर सीमित करने का प्रयास कर रही है। सरकार ने कहा है कि वृहद अर्थव्यवस्था के लिए कुल मौद्रिक नीति रुख मजबूती की राह पर है, हालांकि इसमें मामूली कमजोरी दिखाई दे सकती है। बजट में सरकार ने चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 4.6 प्रतिशत यानी 4,12,817 करोड़ रुपये पर सीमित रखने का लक्ष्य तय किया था। 2011-12 की पहली छमाही में राजकोषीय घाटा 2.8 लाख करोड़ रुपये यानी लक्ष्य का 68 फीसदी तक हो चुका है। छमाही समीक्षा में कहा गया है कि बजट अनुमान की तुलना में राजकोषीय घाटे का प्रतिशत कुछ चिंता पैदा करता है। पांच साल में इसका औसत 54.6 प्रतिशत रहा है।


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