यह ख़बर 04 मई, 2012 को प्रकाशित हुई थी

रिलायंस पर एक अरब डालर का मोटा जुर्माना

खास बातें

  • रिलायंस इंडस्ट्रीज पर एक अरब डॉलर का भारी-भरकम जुर्माना ठोकने के बाद पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि इस मामले में कंपनी का पांच महीने पुराना मध्यस्थता नोटिस वैध नहीं होगा और यदि कंपनी जुर्माने का विरोध करना चाहती है तो उसे नया नोटिस देना होगा।
नई दिल्ली:

रिलायंस इंडस्ट्रीज पर एक अरब डॉलर का भारी-भरकम जुर्माना ठोकने के बाद पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि इस मामले में कंपनी का पांच महीने पुराना मध्यस्थता नोटिस वैध नहीं होगा और यदि कंपनी जुर्माने का विरोध करना चाहती है तो उसे नया नोटिस देना होगा।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने दो मई को रिलायंस इंडस्ट्रीज को एक नोटिस भेजा जिसमें केजी-डी6 क्षेत्र के विकास में हुए 5.75 अरब डॉलर में से 1.005 अरब डॉलर के निवेश को नामंजूर कर दिया था।

मंत्रालय के अनुसार कंपनी द्वारा 2.75 करोड़ घन मीटर प्रति दिन का मौजूदा गैस उत्पादन लक्ष्य से काफी कम है। कार्ययोजना के अनुसार कंपनी ने इस साल के लिए आठ करोड़ घन मीटर प्रति दिन के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था।

मंत्रालय के एक अधिकारी ने आज कहा कि गैस के उत्पादन में कमी के कारण उत्पादन इकाई में तैयार सुविधाओं के बड़े हिस्से का उपयोग नहीं हुआ है या फिर कम हुआ है। मंत्रालय का मानना है कि आरआईएल ने जितने तेल-कूप के उत्खनन का वादा किया था उतना नहीं हुआ है।

आरआईएल को पहले से ही ऐसी पहल की आशंका थी इसलिए 23 नवंबर को मंत्रालय को एक मध्यस्थता नोटिस भेजा था जिसमें कहा गया था कि उत्पादन बंटवारा अनुबंध (पीएससी) के तहत सारे निवेश की वसूली की मंजूरी है जो किसी भी तरह उत्पादन के स्तर से जुड़ा नहीं है।

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सॉलिसिटर जनरल रोहिंटन नरीमन के विचार के आधार पर मंत्रालय ने मध्यस्थता के प्रस्ताव को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि कोई विवाद ही नहीं है। आरआईएल ने पिछले महीने मध्यस्थों की नियुक्ति के लिए उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।