खास बातें
- डब्ल्यूटीओ का मानना है कि ऐसा कर के भारत विदेशी विनिर्माताओं के साथ भेदभाव और मुक्त व्यापार व्यवस्था में बाधा खड़ी कर रहा है।
New Delhi: मुक्त और निष्पक्ष विश्व व्यापार व्यवस्था की निगरानी करने वाली पहुपक्षीय संस्था- विश्व व्यापार संगठन ने सवाल किया है कि भारत क्यों केवल घरेलू कंपनियों के अमोनिमय सल्फेट उर्वरक पर ही सब्सिडी दे रहा है और ऐसी आयातित रासायनिक खाद के लिए सब्सिडी क्यों नहीं है। डब्ल्यूटीओ का मानना है कि ऐसा कर के भारत विदेशी विनिर्माताओं के साथ भेदभाव और मुक्त व्यापार व्यवस्था में बाधा खड़ी कर रहा है। संगठन ने भारत से इस पर सफाई मांगी है। उर्वरक मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, डब्ल्यूटीओ ने भारत से न्यूट्रिएट आधारित उर्वरक सब्सिडी नीति (एनबीएस) से आयतित अमोनियम सल्फेट को अलग रखने का कारण पूछा है। उर्वरक मंत्रालय डब्ल्यूटीओ के सवालों पर विचार कर रहा है और शीघ्र ही इसके बारे में जवाब देगा। उल्लेखनीय है कि सरकार घरेलू बाजार में कम कीमत पर उर्वरक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अमोनियम सल्फेट पर 5,979 रुपये प्रति टन की सब्सिडी दे रही है। देश में अमोनियम सल्फेट के प्रमुख विनिर्माताओं में फर्टीलाइजर एंड केमिकल त्रावणकोर लि0 (एफएसीटी) और गुजरात स्टेट फर्टीलाइजर एंड केमिकल लि0 )जीएसएफसी) शामिल हैं। इनकी सालाना सम्मिलित उत्पादन क्षमता तीन लाख टन से अधिक है। अधिकारी ने बताया कि दोनों कंपनियों द्वारा उत्पादित अमोनिया सल्फेट की कीमत वैश्विक कीमतों से अधिक है और बगैर सरकारी सब्सिडी के इन कंपनियों का चलना मुश्किल है। उद्योग सूत्रों का कहना है कि घरेल उत्पादकों के अमेानिया सल्फेट की कीमत करीब 15,000 रुपये प्रति टन है, जबकि सब्सिडी के बाद बाजार में इसे 8,000 रुपये से 9,000 रुपये प्रति टन पर बेचा जाता है।