खास बातें
- योजना आयोग ने 9 से 9.5 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर को हासिल करने के लिए एफडीआई नीति को उदार बनाने पर जोर दिया है।
नई दिल्ली: योजना आयोग ने 12वीं योजनावधि (2012-17) में 9 से 9.5 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर को हासिल करने के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति को उदार बनाने तथा व्यावसायिक नियमनों में सुधार पर जोर दिया है। चालू योजना में इस समय सकल घरेलू उत्पाद की औसत वार्षिक वृद्धि दर 8.2 प्रतिशत है। योजना आयोग ने विनिर्माण क्षेत्र की कमजोरी पर चिंता जताई है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समक्ष आज यहां पूर्ण योजना पैनल की बैठक में दिए एक प्रस्तुतीकरण में आयोग ने कहा है कि एफडीआई नियमों को उदार और व्यापार की नीतियों को सरल बनाने की जरूरत है, तभी गुणवत्ता वाले निवेश को आकर्षित किया जा सकेगा। आयोग ने इस बात पर चिंता जताई है कि विनिर्माण क्षेत्र का प्रदर्शन कमजोर है और देश को 12वीं योजना में इस क्षेत्र में 11 से 12 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि का लक्ष्य रखना होगा। प्रस्तुतीकरण में कहा गया है कि इस क्षेत्र में वृद्धि के लिए बेहतर मूल्यवर्धन और प्रौद्योगिकी के बेहतर इस्तेमाल की जरूरत है। वृद्धि को बढ़ाने तथा व्यापार संतुलन को सुधारने के लिए यह बेहद जरूरी है। आयोग का मानना है कि बुनियादी ढांचा क्षेत्र की खामियां इसमें सबसे बड़ी बाधा है। ऐसे में आयोग ने राष्ट्रीय विनिर्माण निवेश क्षेत्र के गठन का सुझाव दिया है और औद्योगिक आधार बढ़ाने के लिए बेहतर कारोबारी नियमन ढांचे की वकालत की है। योजना आयोग ने कहा है कि विशिष्ट विनिर्माण उद्योग, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के अधिक उदार नियम और उदार व्यापार नीतियां और बेहतर नियमन ढांचा इसका इलाज है। प्रस्तुतीकरण के दौरान योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया ने चेताया कि विनिर्माण क्षेत्र वांछित नतीजे नहीं दे पा रहा है और इसका विपरीत असर पड़ सकता है। ऐसे में इस दिशा में नई पहल की जरूरत है। आयोग ने कारोबार की लागत को कम करने तथा पारदर्शिता के लिए कारोबार नियमन ढांचे में सुधार की जरूरत पर भी बल दिया है। आयोग ने कहा, आमतौर पर यह धारणा है कि उद्योगों को अनिश्चितता तथा राजनीतिक जोड़तोड़ के भय से बचाने के लिए नियमन में पारदर्शी व्यवस्था की जरूरत है। योजना आयोग ने कहा है कि चालू योजनावधि (2007-12) के दौरान देश की आर्थिक वृद्धि दर औसतन 8.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह 11वीं योजना के लक्ष्य 9 प्रतिशत से कम है। हालांकि, आयोग का मानना है कि 8.2 प्रतिशत की वृद्धि भी वैश्विक आर्थिक मंदी को देखते हुए शानदार कही जा सकती है। योजना आयोग ने इस बात का जिक्र किया है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार तमाम कोशिशों के बावजूद बहु ब्रांड खुदरा क्षेत्र को एफडीआई के लिए खोल नहीं पाई है, क्योंकि कुछ क्षेत्रों से इसका पुरजोर विरोध हो रहा है। आयोग ने कहा, ऐसा माना जाता है कि उदार एफडीआई नीति से न केवल मुनाफाखोरी पर लगाम लगेगी, पर इससे श्रमबल का भी नियमन हो सकेगा। प्रस्तुतीकरण में विशेष आर्थिक क्षेत्रों (सेज) के समक्ष आ रही दिक्कतों का भी उल्लेख किया गया है, क्योंकि कुछ वर्गों और लोगों में यह आशंका है कि इससे उत्पादक कृषि भूमि उनसे छिन जाएगी। आयोग ने सूक्ष्म, लघु और मंझोले उपक्रमों (एमएसएमई) के लिए क्लस्टर को आगे बढ़ाने का सुझाव दिया है, जिससे इस क्षेत्र की उत्पादकता बढ़ाई जा सके। अन्य सुझावों में आयोग ने कहा है कि सरकार को 2012 से शुरू हो रही पंचवर्षीय योजना के दौरान कृषि क्षेत्र के लिए 4 प्रतिशत की वृद्धि दर के लक्ष्य को लेकर चलना चाहिए। इस उद्देश्य के लिए किसानों को बेहतर ग्रामीण ढांचा मुहैया कराए जाने की जरूरत है। साथ ही भंडारण तथा खाद्य प्रसंस्करण सुविधाओं को भी बेहतर बनाया जाना चाहिए।