खास बातें
- सरकार ने नागर विमानन मंत्रालय के प्रस्ताव पर अपना रुख अभी तक तय नहीं किया है। मंत्रालय ने तीन साल पहले यह प्रस्ताव भेजा था।
नई दिल्ली: विदेशी विमानन कंपनियों से निवेश आकषिर्त करने की उम्मीद कर रही भारतीय विमानन कंपनियों को अभी इंतजार करना पड़ सकता है क्योंकि सरकार ने नागर विमानन मंत्रालय के प्रस्ताव पर अपना रुख अभी तक तय नहीं किया है। मंत्रालय ने तीन साल पहले यह प्रस्ताव भेजा था। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि इस प्रस्ताव में विदेशी विमानन कंपनियों को घरेलू विमानन कंपनियों में निवेश की अनुमति देने की सिफारिश की गई है जिसकी समीक्षा की जा रही है। अभी तक कोई दिशानिर्देश नहीं बनाया गया है। इस समय, घरेलू विमानन कंपनियों में 49 प्रतिशत तक एफडीआई की अनुमति है, जबकि एनआरआई 100 प्रतिशत तक निवेश कर सकते हैं, लेकिन विदेशी विमानन कंपनियों को सुरक्षा के आधार पर 100 प्रतिशत निवेश करने की मनाही है। नागर विमानन मंत्रालय ने 2008 में औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग को कुल 49 प्रतिशत में से 26 प्रतिशत निवेश विदेशी विमानन कंपनियों को करने की अनुमति देने का प्रस्ताव किया था ताकि वे उन भारतीय विमानन कंपनियों के निदेशक मंडल में अपने अधिकारियों को शामिल करा सकें जिनमें वे निवेश करती हैं। बहरहाल, मंत्रालय ने विदेशी विमानन कंपनियों को संपूर्ण 49 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति के एक अन्य प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है और इसके बजाय 26 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति दिये जाने का सुझाव दिया है। विमानन उद्योग का मानना है कि भारतीय विमानन कंपनियों का जबरिया अधिग्रहण किया जा सकता है क्योंकि वे कठित वित्तीय दौर से गुजर रही हैं। घरेलू विमानन कंपनियों में विदेशी विमानन कंपनियों को निवेश करने की अनुमति देने के प्रस्ताव का किंगफिशर एयरलाइन्स के प्रवर्तक विजय माल्या और कुछ विदेशी विमानन कंपनियां जबरदस्त समर्थन करती रही हैं। हालांकि जेट एयरवेज जैसी घरेलू विमानन कंपनियां इस प्रकार के कदम का विरोध करती रहीं हैं।