खास बातें
- सर्वेक्षण में 175 देशों को शामिल किया गया और वहां की अर्थव्यवस्था में निवेशकों के लिए जोखिम का अध्ययन किया गया।
न्यूयॉर्क: तेजी से तरक्की के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था निवेश की दृष्टि से 'बेहद जोखिमभरी' है। साथ ही रूस, इंडोनेशिया, नाइजीरिया और फिलीपींस में भी निवेश खतरारहित नहीं है। यह नतीजा मैपलक्रॉफ्ट कम्पनी के सर्वेक्षण से सामने आया है। सर्वेक्षण में 175 देशों को शामिल किया गया और वहां की अर्थव्यवस्था में निवेशकों के लिए जोखिम का अध्ययन किया गया। सर्वेक्षण के आधार पर जारी ग्लोबल रिस्क एटलस 2011 की रिपोर्ट में अफगानिस्तान, सोमालिया और सूडान की अर्थव्यस्था को निवेशकों के लिए 'सबसे अधिक जोखिमभरा' बताया गया है। इसका आधार कमजोर शासन, आंतरिक संघर्ष और क्षेत्रीय अस्थिरता को बनाया गया है। मैपलक्रॉफ्ट के अनुसार सुरक्षा, सरकार, अनुचित अर्थनीति, संसाधनों की सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, महामारी, सामाजिक उदारता और मानवाधिकार निवेशकों के लिए सात प्रमुख 'वैश्विक जोखिम' हैं। भारत, रूस, नाइजीरिया, इंडोनेशिया और फिलीपींस में हालांकि निवेशकों के हितों का खास खयाल रखा जाता है, लेकिन वहां व्यापार को चुनौतियां भी बहुत हैं। मैपलक्रॉफ ने अपनी रिपोर्ट में फिलीपींस को 8वें स्थान पर रखा है, जबकि रूस को 10वें और भारत को 11वें स्थान पर रखा गया है। उसके अनुसार इन देशों में राजनीतिक हिंसा, आतंकवाद और सुरक्षा कारणों से अर्थव्यवस्था को खतरा है। इसलिए इन देशों में काम करने वाली कम्पनियों को उन चुनौतियों को पहचाने और उस पर निगरानी रखने की जरूरत है, जो उन्हें अवसरों के साथ ही साथ मिलती है। मैपलक्रॉफ्ट की रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था को सुरक्षा कारणों से जोखिमभरा बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार भारत को आतंकवादियों और नक्सलियों से लगातार खतरा बना है। सामाजिक व्यवस्था में लचीलापन के अभाव को इसका एक महत्वपूर्ण कारण बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत अर्थव्यवस्था के बावजूद वहां मानवाधिकारों की स्थिति बेहद खराब है और समाज का एक बड़ा वर्ग शिक्षा, स्वास्थ्य तथा स्वच्छता जैसी मौलिक जरूरतों की पहुंच से दूर है। रूस में भी करीब-करीब यही स्थिति है। यह लगातार आतंकवादियों और अलगाववादियों के निशाने पर है।