खास बातें
- सरकार ने मंगलवार को निर्यात सम्बंधी शुल्कों (ट्रांजेक्शन कॉस्ट) में कुल 2,100 करोड़ रुपये की कटौती करने वाले कई कदमों की घोषणा की।
नई दिल्ली: सरकार ने मंगलवार को निर्यात सम्बंधी शुल्कों (ट्रांजेक्शन कॉस्ट) में कुल 2,100 करोड़ रुपये की कटौती करने वाले कई कदमों की घोषणा की, जिससे भारत का निर्यात अधिक प्रतियोगी हो जाएगा। इन कदमों में आठ बंदरगाहों पर 24 घंटे कस्टम क्लियरेंस की व्यवस्था करना भी शामिल है। केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने इससे सम्बंधित टास्क फोर्स की एक रिपोर्ट जारी की। टास्क फोर्स ने अपनी रिपोर्ट में भारतीय निर्यात को प्रतियोगी बनाने के लिए 44 सुझाव दिए गए हैं। ट्रांजेक्शन कॉस्ट भारत के कुल निर्यात मूल्य का सात से 10 फीसदी होता है। टास्क फोर्स की अध्यक्षता करने वाले वाणिज्य और उद्योग राज्यमंत्री ज्योतिरादितय सिंदिया ने कहा कि सरकार ने 44 में से 32 सुझावों को स्वीकार कर लिया है। इनमें से 21 सुझाव लागू कर दिए गए हैं। अगले कुछ महीनों में दो अन्य सुझाव भी लागू हो जाएंगे। बाकी सुझाव पर विचार जारी है। सिंधिया ने कहा कि इन 23 सुझावों को लागू करने से निर्यात शुल्कों में कुल लगभग 2,100 करोड़ रुपये की कटौती हो जाएगी। लागू किए गए महत्वपूर्ण सुझाव में से आठ बंदरगाहों पर 24 घंटे कस्टम क्लियरेंस और विभिन्न शुल्कों में कटौती शामिल हैं। जिन आठ बंदरगाहों पर 24 घंटे कस्टम क्लियरेंस की व्यवस्था की जाएगी, उनमें हैं : विशाखापत्तनम, कोलकाता, जामनगर, मंगलोर, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (नवी मुम्बई), मुम्बई, भुवनेश्वर और चेन्नई। अन्य कदमों में विदेशी मुद्रा के लिए बुकिंग शुल्क को 750 रुपये प्रति ट्रांजेक्शन से घटाकर 400-500 रुपये कर दिया गया है। दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा ने इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा के एक्सप्रेस कूरियर टर्मिनल पर एक्सप्रेस कार्गो और कूरियर जहाजों की जांच पर लगने वाले शुल्क को 6 रुपये प्रति किलो से घटाकर 1.65 रुपये प्रति किलो कर दिया है। औद्योगिक संगठनों ने सरकार से अन्य सुझावों को भी लागू करने की मांग की है। फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के महासचिव अमित मित्रा ने कहा कि इस रिपोर्ट में कुल ट्रांजेक्शन कॉस्ट के 25 फीसदी को ही शामिल किया गया है। सरकार से उम्मीद है कि वह बाकी मुद्दों पर भी विचार करेगी। उन्होंने कहा कि इन लागत को हमेशा के लिए हटा देने से निर्यात प्रतियोगी हो जाएगा। भारतीय उद्योग परिसंघ के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि निर्यात में प्रतियोगी बने रहने के लिए इन लागत में कमी किया जाना जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता के लिए मूल्यों में कमी और गुणवत्ता को बेहतर करना जरूरी है।