यह ख़बर 13 नवंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

देश में विकास के साथ रोजगार नहीं बढ़ा : सलाहकार

खास बातें

  • राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के सदस्य एनसी सक्सेना ने कहा देश में रोजगार के समुचित अवसर पैदा नहीं किए गए, भले ही विकास दर 8% से अधिक रही।
New Delhi:

11वीं पंचवर्षीय योजना अवधि में भले ही देश का विकास आठ फीसदी से अधिक की रफ्तार से हुआ, लेकिन इस दौरान रोजगार में वृद्धि नहीं हुई। यह कहना है देश के एक वरिष्ठ सलाहकार का। राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के सदस्य एनसी सक्सेना ने कहा कि रोजगार के अवसर की स्थिति जस की तस बनी रहने का कारण सिर्फ इतना कहा जा सकता है कि देश में रोजगार के समुचित अवसर पैदा नहीं किए गए, भले ही विकास दर आठ फीसदी से अधिक रही। उन्होंने कहा, 11वीं पंचवर्षीय योजना अवधि में विकास के साथ रोजगार के अवसर नहीं बढ़े। सक्सेना सेवानिवृत्त नौकरशाह हैं। उन्होंने कहा कि सरकार कहती है कि अब अधिक युवा और बच्चे स्कूल पढ़ने जाते हैं, लेकिन इससे यह नहीं पता चलता कि आखिर देश में चार करोड़ लोग बेरोजगार क्यों हैं (राष्ट्रीय सैम्पल सर्वे संगठन के 66वें सर्वेक्षण के मुताबिक)। यदि देश में रोजगार के अवसर बढ़े तो बेरोजगारों की इतनी बड़ी संख्या नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह मुद्दा राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) की अध्यक्ष सोनिया गांधी के सामने उठाया है। सक्सेना ने सरकारी नीति में खामी की ओर इशारा करते हुए कहा कि 11वीं पंचवर्षीय योजना में सरकार ने पांच करोड़ रोजगार सृजन करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन इस दौरान सिर्फ 10 लाख नौकरियों का सृजन हो पाया। अब 12वीं पंचवर्षीय योजना में सरकार ने रोजगार के छह करोड़ अवसर  पैदा करने जैसा असम्भव सरीखा लक्ष्य रखा है। सक्सेना योजना आयोग के सदस्य सचिव भी रह चुके हैं। बेरोजगारी दूर करने के लिए सक्सेना ने आशा व्यक्त की कि कौशल विकास से सम्बद्ध राष्ट्रीय विकास परिषद युवाओं में कौशल विकास करने को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाएगी। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही सरकार को असंगठित क्षेत्र में रोजगार की गुणवत्ता बढ़ाने पर भी काम करना चाहिए, जहां 92 फीसदी श्रमिक काम कर रहे हैं।


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