खास बातें
- केंद्रीय सतर्कता आयोग सीवीसी ने सीबीआई से कहा है कि वह एक निजी फर्म द्वारा बड़े ऋण घपले की जांच करे।
नई दिल्ली: केंद्रीय सतर्कता आयोग सीवीसी ने सीबीआई से कहा है कि वह एक निजी फर्म द्वारा बड़े ऋण घपले की जांच करे। इस घपले में एक निजी फर्म पर आरोप है कि उसने विभिन्न राष्ट्रीयकृत बैंकों से 1,100 करोड़ रुपये का ऋण लेकर उसका दुरपयोग किया।
सीवीसी के अधिकारियों ने कहा है कि यह फर्म विभिन्न बैंकों से यह कहकर ऋण ले रही थी कि इसका इस्तेमाल विभिन्न राज्यों के किसान अरंडी के उत्पादन व आपूर्ति के लिए करेंगे।
उन्होंने कहा कि इंडियन बैंक की गोतरी शाखा अहमदाबाद ने इस कंपनी के साथ गठजोड़ के तहत 31 दिसंबर 2007 को 11 कमीशन एजेंटों को 50 करोड़ रुपये का अल्पकालिक ऋण मंजूर किया।
सीवीसी ने कहा है, कमीशन एजेंटों को यह ऋण आगे किसानों को अरंडी की खरीद तथा खेती के लिए देना था। हालांकि इस दौरान ऋण खातों में कई कमियां सामने आईं। बैंक की जांच में सामने आया कि फर्म ने कमीशन एजेंटों के नाम पर ऋण लेकर घपला किया। हालांकि बाद में पता चला कि फर्म इस उद्देश्य का हवाला देकर कई बैंकों से कर्ज ले चुकी है।
सीवीसी के अनुसार, सारे मामले में कुल राशि 1,110 करोड़ रुपये की है। भारतीय स्टेट बैंक की अगुवाई वाले समूह के नौ बैंकों तथा अनेक अन्य बैंकों ने समूह के रूप में इस फर्म को कर्ज दिया।
अधिकारियों का कहना है कि आयोग इस कथित घपले में कुछ बैंक अधिकारियों की कथित संलिप्तता की जांच कर रहा है। आयोग का कहना है कि इस मामले में धन ग्राम स्तरीय संग्राहकों विलेज लेवल एग्रीगेटर्स के जरिए गायब की गई। इनकी नियुक्ति कंपनी ने ही की थी।
आयोग ने सीबीआई को सलाह दी है कि वह मामला दर्ज कर इस प्रकरण की जांच करे। आयोग ने बैंक के दोषी अधिकारियों के खिलाफ जुर्माना लगाने की कार्रवाई शुरू करने को कहा है।