खास बातें
- उत्तर भारत में बिजली की घोर किल्लत के बाद भी पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में अतिरिक्त बिजली उत्पादन पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है, क्योंकि कुप्रबंधन के शिकार उत्तर भारत के बिजली बोर्डों के पास बिजली की कीमत देने के लायक पैसा नहीं है।
शिमला: उत्तर भारत में बिजली की घोर किल्लत के बाद भी पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश में अतिरिक्त बिजली उत्पादन पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है, क्योंकि कुप्रबंधन के शिकार उत्तर भारत के बिजली बोर्डों के पास बिजली की कीमत देने के लायक पैसा नहीं है। इसलिए पहाड़ी राज्य में अतिरिक्त बिजली उत्पादन को कम कीमत पर खुले बाजार में बेच दिया जाता है।
हिमाचल प्रदेश के प्रधान सचिव सुद्रिप्ता राय ने कहा, "हमें 50 फीसदी अतिरिक्त बिजली के लिए खरीदार नहीं मिल रहे हैं। पहले बड़े पैमाने पर बिजली खरीदने वाले राज्य अब बिजली खरीदने की जगह बिजली कटौती को अधिक तरजीह दे रहे हैं।"
हिमाचल प्रदेश देश के सबसे बड़े पनबिजली उत्पादकों में से है और यहां 7,913 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है। इसमें से 810 मेगावाट बिजली अप्रैल से अक्टूबर के बीच बेचने के लिए उपलब्ध रहती है।
हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड लिमिटेड के अधिकारियों ने कहा कि पिछले साल गर्मी तक पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड बिजली के नियमित खरीदार थे। इन राज्यों के बिजली वितरण कम्पनियों के पास नकदी का अभाव हो गया है और वे बिजली खरीदने की जगह बिजली कटौती का तरीका अपना रहे हैं।
प्रधान सचिव ने कहा, "बिजली का संरक्षण नहीं किया जा सकता है। इसका उपयोग नहीं किया जाए, तो यह बर्बाद हो जाता है। चूंकि कोई नियमित खरीदार नहीं मिल रहा है, इसलिए राष्ट्रीय पावर एक्सचेंज के जरिए हम इसे कम लाभ पर खुले बाजार में बेचने के लिए मजबूर हैं।"
राय ने कहा कि उत्तर प्रदेश को 4.30 रुपये प्रति इकाई की दर से बड़े पैमाने पर बिजली बेची गई थी, लेकिन वह 180 करोड़ रुपये का भुगतान करने में असफल रहा। उन्होंने कहा, "हमने तय किया है कि जब तक उत्तर प्रदेश बकाए का भुगतान नहीं करता, उसे बिजली आपूर्ति नहीं की जाएगी।"
हिमाचल प्रदेश में काफी बड़ा जल संसाधन होने के कारण लगभग 23,560 मेगावाट बिजली उत्पादन की सम्भावना है लेकिन अब तक 7,913 मेगावाट का ही दोहन हो पाया है।