यह ख़बर 27 मार्च, 2014 को प्रकाशित हुई थी

2014-15 में वृद्धि को लेकर अर्थशास्त्री बहुत आशावादी नहीं

नई दिल्ली:

चालू वित्तवर्ष में आर्थिक वृद्धि दर में मामूली सुधार के बीच अर्थशास्त्री वर्ष 2014-15 में देश की आर्थिक तस्वीर में व्यापक बदलाव को लेकर बहुत आशावादी नहीं हैं। आरबीआई के पूर्व डिप्टी गवर्नर सुबीर गोकर्ण ने कहा, हमें संरचनात्मक बाधाओं को दूर करना होगा। हालांकि, इसके तत्काल कोई परिणाम नहीं आएंगे, बल्कि गति के लिए आधार तैयार होगा।

उन्होंने कहा, इसलिए, मुझे अगले वित्तवर्ष में आर्थिक वृद्धि, मुद्रास्फीति और औद्योगिक उत्पादन के मोर्चे पर कोई बहुत व्यापक बदलाव नहीं दिखता। हालांकि, भुगतान संतुलन पिछले साल के मुकाबले अधिक आरामदायक स्थिति में होगा।

इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए जेएम फाइनेंसियल के चेयरमैन निमेश कंपानी ने कहा कि अगले वित्तवर्ष में आर्थिक वृद्धि 2013-14 से बहुत अलग नहीं होगी। हालांकि उन्होंने कहा, यह 2015-16 में 6.5 से 7 प्रतिशत तक जा सकती है, बशर्ते सही सरकार आए, सही नीतिगत निर्णय किए जाएं और केंद्र व राज्य के बीच संबंधों में सुधार हो।

दूसरी ओर, ओक्सस इनवेस्टमेंट्स के सुरजीत भल्ला ने एक आशावादी तस्वीर पेश करते हुए कहा कि उन्हें अगले वित्तवर्ष में जीडीपी वृद्धि दर करीब 7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। भल्ला ने कहा कि अगले वित्तवर्ष में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति 6 प्रतिशत के आसपास रहेगी, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की वृद्धि 5 से 6 प्रतिशत और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि 7 प्रतिशत से अधिक रहने की उम्मीद है।

रुपये की स्थिति पर गोकर्ण ने कहा कि चालू खाते के घाटे में जो तीव्र गिरावट आई, उसका रुपये पर सीधा असर दिखाई दिया है और इसमें उम्मीद से तीव्र गति के साथ सुधार आया है।


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