खास बातें
- वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने 2011-12 के लिए आर्थिक समीक्षा लोकसभा में प्रस्तुत करते हुए वित्तवर्ष 2012-13 के दौरान 7.6 फीसदी विकास दर रहने का अनुमान व्यक्त किया है।
नई दिल्ली: आर्थिक समीक्षा में चालू वित्तवर्ष 2011-12 के दौरान आर्थिक वृद्धि दर गिरकर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर में नरमी औद्योगिक गतिविधियों वृद्धि के कम होने का परिणाम है।
संसद में गुरुवार को प्रस्तुत वर्ष 2011-12 की आर्थिक समीक्षा के अनुसार आर्थिक वृद्धि में कमी नरमी का संकेत है। यह न केवल पिछले दो साल की आर्थिक वृद्धि दर से कम है, बल्कि 2008-09 की आर्थिक नरमी को छोड़ दिया, जो तो इस बार वृद्धि 2003 से 2011 के बीच सबसे कम है। पिछले दो साल आर्थिक वृद्धि दर जहां 8.4 प्रतिशत थी, वहीं 2008-09 में जीडीपी वृद्धि 6.7 प्रतिशत थी। बहरहाल, वित्तवर्ष 2012-13 तथा 2013-14 में आर्थिक वृद्धि दर क्रमश: 7.6 प्रतिशत तथा 8.6 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई गई है।
लोकसभा में पेश समीक्षा के अनुसार आर्थिक नरमी का कारण औद्योगिक वृद्धि दर में कमी का नतीजा है। कृषि तथा सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन पूर्व की तरह बेहतर रहा है। चालू वित्तवर्ष के दौरान सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर दर जहां 9.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, वहीं कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र की वृद्धि दर 2.5 प्रतिशत रह सकती है। बहरहाल, औद्योगिक क्षेत्र की वृद्धि दर 2011-12 की अप्रैल-दिसंबर के दौरान 3.6 प्रतिशत रही, जो इससे पूर्व वित्तवर्ष की इसी अवधि में 8.3 प्रतिशत थी।
जीडीपी में तीनों क्षेत्रों के योगदान को देखा जाए, तो इसमें सेवा क्षेत्र अव्वल रहा। सेवा क्षेत्र का योगदान चालू वित्तवर्ष में बढ़कर 59 प्रतिशत रहा, जबकि इससे पिछले वित्तवर्ष में यह 58 प्रतिशत था। औद्योगिक क्षेत्र का योगदान 27 प्रतिशत रहा, जबकि शेष हिस्सेदारी कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र की रही। आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि जीडीपी वृद्धि दर नरम होकर 6.9 प्रतिशत रहने के बावजूद भारत तीव्र आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने वाले देशों में शामिल है। तेजी से उभरते देशों के साथ दुनिया के प्रमुख देशों में उल्लेखनीय नरमी देखी जा रही है।
अगले वित्तवर्ष 2012-13 की आर्थिक वृद्धि दर के बारे में समीक्षा में कहा गया है कि यह चालू वित्तवर्ष के मुकाबले बेहतर रहेगी और इसके 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। समीक्षा में अनुमान जताया गया है कि अगले वित्तवर्ष में राजकोषीय स्थिति सुदृढ करने के उपाय किए जाएंगे तथा बचत और पूंजी निर्माण की दर में वृद्धि होगी। सकल पूंजी निर्माण की दर 2011-12 की तीसरी तिमाही में 30 प्रतिशत थी, जो इससे पूर्व वित्तवर्ष की इसी तिमाही में 32 प्रतिशत थी।
समीक्षा में आगे कहा गया है कि साथ ही आने वाले महीनों में मुद्रास्फीति दबाव कम होने से रिजर्व बैंक नीतिगत ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। इससे निवेश गतिविधियों में तेजी आएगी और आर्थिक वृद्धि पर इसका सकारात्मक असर पड़ेगा। इसमें कहा गया है कि शुरुआती अनुमानों के अनुसार आर्थिक वृद्धि दर 2013-14 में 8.6 प्रतिशत रहेगी। यह मानसून का सामान्य रहना, अंतरराष्ट्रीय जिंसों खासकर तेल की कीमतों में स्थिरता और वैश्विक वृद्धि अधिक रहने की संभावना पर आधारित है। समीक्षा के अनुसार वैश्विक अर्थव्यवस्था नाजुक बने रहने की आशंका है और इसमें सुधार के लिए जी-20 के जरिये समन्वित प्रयास करने की जरूरत है।