खास बातें
- आर्थिक समीक्षा के अनुसार दुनिया के हालात को देखते हुए भारत में ऊंची महंगाई दर से जल्द निजात मिलने की संभावना फिलहाल नहीं नजर आ रही है।
New Delhi: आर्थिक समीक्षा 2010-11 के अनुसार दुनिया के हालात को देखते हुए भारत में ऊंची महंगाई दर से जल्द निजात मिलने की संभावना फिलहाल नहीं नजर आ रही है। वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी द्वारा संसद में पेश इस विस्तृत रपट में ऊंची मुद्रास्फीति पर चिंता व्यक्त करते हुए समीक्षा में कहा गया है कि यह इस वित्तवर्ष के अंत (मार्च, 2011 की समाप्ति) में सामान्य स्तर से डेढ़ प्रतिशत ऊपर रह सकती है। उल्लेखनीय है कि गुरुवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी संसद में कहा था कि मार्च अंत तक मुद्रास्फीति 7 प्रतिशत रहेगी, जबकि वित्तवर्ष के शुरू में इसके 5.5 प्रतिशत तक रहने का अनुमान लगाया गया था। आर्थिक समीक्षा में कहा गया है, वैश्विक स्तर पर उपभोक्ता वस्तुओं के ऊंचे दाम से घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव बना रहेगा। इसके अलावा कई विकसित देश अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए नकदी की उपलब्धता बढ़ाने में लगे हैं। इसका असर भी घरेलू अर्थव्यवस्था में महंगाई बढ़ने के रूप में सामने आ सकता है। समीक्षा में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी अपनी ताजा रिपोर्ट में इस तरफ इशारा करते हुए कहा है कि दुनिया के उभरते और विकासशील राष्ट्रों में उपभोक्ता मूल्य से जुडी मुद्रास्फीति ऊंची बनी रहेगी। आईएमएफ ने कहा है कि विकासशील देशों में आपूर्ति की कमी और मांग का जोर बना रहने से बाजार पर दबाव बना रहेगा। समीक्षा में तेल की कीमतों में उछाल का जिक्र करते हुए कहा गया है, अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष ने अक्टूबर, 2010 में पेट्रोलियम मूल्य की औसत दर 79 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया था। जनवरी में यह अनुमान बढ़ाकर 90 डॉलर कर दिया गया। इसके अलावा गैर-पेट्रोलियम जिंसों के दामों में भी 2011 में 11 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताया गया है। उल्लेखनीय है कि भारत में जनवरी में सकल मुद्रास्फीति दर 8.23 प्रतिशत रही है। एक महीना पहले यह 8.43 प्रतिशत रही। खाद्य मुद्रास्फीति में कुछ नरमी का रुख बना है, लेकिन अभी भी यह 11.49 प्रतिशत की ऊंचाई पर है। इससे पहले 25 दिसंबर को समाप्त सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति 18.32 प्रतिशत तक चढ़ गई थी।