यह ख़बर 03 दिसंबर, 2012 को प्रकाशित हुई थी

लोकसभा में एफडीआई पर चर्चा 4-5 दिसम्बर को, सरकार आश्वस्त

खास बातें

  • खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मुद्दे पर चर्चा चार-पांच दिसम्बर को होगी और उसके बाद मतदान होगा। केंद्र में कांग्रेस की अगुवाई वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार को इसमें जीत का भरोसा है।
नई दिल्ली:

खुदरा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के मुद्दे पर चर्चा चार-पांच दिसम्बर को होगी और उसके बाद मतदान होगा। केंद्र में कांग्रेस की अगुवाई वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार को इसमें जीत का भरोसा है। सरकार ने सोमवार को सभी पार्टियों से अपील की कि वे इस मुद्दे पर 'राजनीति' से दूर रहें।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ ने संवाददाताओं से कहा, "हम संख्या बल को लेकर आश्वस्त हैं।" इस मुद्दे पर सदन में चर्चा को 'पूरी तरह राजनीति' करार देते हुए उन्होंने अन्य दलों से अपील की कि वे विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की ओर से प्रायोजित प्रस्ताव को खारिज कर दें।

कमलनाथ ने कहा, "मैं सभी पार्टियों से अपील करता हूं कि वे प्रस्ताव की राजनीति को खारिज कर दें और सदन में राजनीति के खिलाफ मतदान करें। एफडीआई पर केंद्र की नीति स्पष्ट है कि राज्यों को इसे लागू करने के बारे में निर्णय लेने का पूरा अधिकार होगा।"

कमलनाथ ने यह भी कहा कि यदि आवश्यकता हुई तो सरकार खुदरा क्षेत्र में एफडीआई की अनुमति देने के लिए आवश्यक विदेशी विनिमय प्रबंधन अधिनियम (फेमा) में संशोधन संसद के दोनों सदनों से पारित करवा लेगी। उन्होंने कहा, "नियमों के मुताबिक इसका एक ही सदन से पारित होना काफी है। लेकिन यदि आवश्यकता होती है तो हम इसे दोनों सदनों में पारित करवाएंगे।"

माकपा नेता सीताराम येचुरी ने हाल ही में कहा था कि फेमा संशोधनों का संसद के दोनों सदनों से पारित होना आवश्यक है। यदि सरकार ऐसा नहीं करती है तो इसे अदालत में चुनौती दी जाएगी।

भाजपा भी फेमा संशोधन विधेयक दोनों सदनों से पारित कराए जाने की मांग कर रही है।

लोकसभा में नियम 184 और राज्यसभा में नियम 168 के तहत चर्चा होने जा रही है। दोनों नियमों में चर्चा के बाद मतदान का प्रावधान है।

केंद्र सरकार निचले सदन में संख्या बल अपने पक्ष में होने को लेकर आश्वस्त है, जबकि उच्च सदन में संख्या बल उसके पक्ष में नहीं है।

सूत्रों का कहना है कि राज्यसभा में एफडीआई पर मतदान को लेकर संप्रग सरकार को बाहर से समर्थन दे रही समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

सपा नेता राम गोपाल यादव पिछले सप्ताह कह चुके हैं कि पार्टी राज्यसभा में एफडीआई का विरोध करेगी। लेकिन सरकारी सूत्रों को भरोसा है कि वे सपा को मनाने में कामयाब होंगे।

केंद्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला ने कहा, "हम दोनों सदनों में समर्थन के लिए अन्य दलों से बातचीत कर रहे हैं।"
संप्रग का दावा है कि 245 सदस्यीय राज्यसभा में इसके सदस्यों की संख्या 90 है, जबकि उसे बाहर से समर्थन देने वाली बसपा, सपा तथा लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ इसके पास 117 का संख्या बल है।

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वहीं, विपक्ष का दावा है कि उसके पास 110 सदस्यों का संख्या बल है। इसके अतिरिक्त सात निर्दलीय, छोटी पार्टियों के पांच तथा मनोनीत सदस्यों की संख्या 10 है।