डिजिटल इकोनॉमी का 2028-29 तक GDP में 25 प्रतिशत योगदान होगा: नैबफिड प्रमुख

Digital Economy: नैबफिड के चेयरमैन कामत का मानना है कि बुनियादी ढांचा निवेश को आगे बढ़ाने से रोकने की कोई वजह नहीं है, क्योंकि अर्थव्यवस्था में एक्सप्रेसवे, राजमार्ग, हवाई अड्डे, बंदरगाह और हाई स्पीड ट्रेन के लिए बहुत गुंजाइश है.

डिजिटल इकोनॉमी का 2028-29 तक GDP में 25 प्रतिशत योगदान होगा: नैबफिड प्रमुख

Indian Economy: वर्तमान समय में भारतीय अर्थव्यवस्था 3,300 अरब डॉलर की है.

नई दिल्ली:

नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस एंड डेवलपमेंट बैंक यानी नैबफिड (NaBFID) के प्रमुख के वी कामत का मानना है कि वित्त वर्ष 2028-29 तक देश के बढ़े हुए जीडीपी (GDP) में डिजिटल क्षेत्र (Digital Sector) का योगदान 25 प्रतिशत तक होगा. उस समय तक देश की अर्थव्यवस्था के 7,000 अरब डॉलर पर पहुंच जाने की भी उम्मीद है. फिलहाल डिजिटल इकोनॉमी का योगदान चार प्रतिशत से कम है, जबकि चीन में यह 40 प्रतिशत तक है. सरकार और योजनाकारों का मानना है कि वित्त वर्ष 2028-29 तक जापान को पीछे छोड़ते हुए भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा. अभी भारतीय अर्थव्यवस्था 3,300 अरब डॉलर है. इसके उस समय तक 7,000 अरब डॉलर पर पहुंचने की उम्मीद है.

कामत ने 'पीटीआई-भाषा' के साथ बातचीत में कहा, 'डिजिटल इकोनॉमी- डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, ई-कॉमर्स और अन्य डिजिटल पेमेंट एंड सर्विस सेगमेंट देश की वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं. वित्त वर्ष 2028-29 तक भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार 7,000 अरब डॉलर होगा. इसमें डिजिटल इकोनॉमी का हिस्सा 25 प्रतिशत होगा जो फिलहाल चार प्रतिशत से कम है.'

आईसीआईसीआई बैंक के पूर्व चेयरमैन कामत ने कहा, ‘‘चीन की अर्थव्यवस्था का 40 प्रतिशत आज डिजिटल सेक्टर से आता है, और मुझे ऐसा कोई कारण नहीं दिखता कि हम इसे हासिल न कर सके.''

नैबफिड के चेयरमैन कामत का मानना है कि बुनियादी ढांचा निवेश को आगे बढ़ाने से रोकने की कोई वजह नहीं है, क्योंकि अर्थव्यवस्था में एक्सप्रेसवे, राजमार्ग, हवाई अड्डे, बंदरगाह और हाई स्पीड ट्रेन के लिए बहुत गुंजाइश है. उन्होंने कहा कि  शहरी कायाकल्प की और परियोजनाएं हो सकती हैं. इसे सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित करने की कोई वजह नहीं है. उन्होंने कहा, ‘‘हमें विश्वस्तरीय शहर बनाने चाहिए और मौजूदा शहरों का भी उन्नयन करना चाहिए.'

कामत ने कहा कि अगले पांच साल में भारतीय अर्थव्यवस्था दोगुनी होकर 7,000 अरब डॉलर पर पहुंच जाएगी. ऐसे में हमें अर्थव्यवस्था की मांग को पूरा करने के लिए अधिक एक्सप्रेसवे, और हवाई अड्डों तथा बंदरगाहों की जरूरत होगी. उन्होंने कहा कि बैंकों की संपत्ति की गुणवत्ता में फिर गिरावट की संभावना नहीं है. उन्होंने कहा कि बैंक बुनियादी ढांचा वित्तपोषण का अभिन्न अंग बने रहेंगे लेकिन दीर्घावधि के कोष के लिए हमें और स्रोतों को भी देखने की जरूरत है.

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