खास बातें
- ऊंची ब्याज लागत तथा इस तिमाही में बिक्री में गिरावट की वजह से 26 में से 15 क्षेत्रों के मार्जिन पर भारी दबाव है। ऐसे में क्रिसिल ने अनुमान लगाया है कि चालू तिमाही में देश की प्रमुख कंपनियों की आमदनी छह तिमाहियों में सबसे निचले स्तर पर रहेगी।
मुंबई: ऊंची ब्याज लागत तथा इस तिमाही में बिक्री में गिरावट की वजह से 26 में से 15 क्षेत्रों के मार्जिन पर भारी दबाव है। ऐसे में क्रिसिल ने अनुमान लगाया है कि चालू तिमाही में देश की प्रमुख कंपनियों की आमदनी छह तिमाहियों में सबसे निचले स्तर पर रहेगी।
क्रिसिल ने मंगलवार को कहा कि अप्रैल-जून तिमाही में आय की वृद्धि दर घटकर 14 प्रतिशत पर आने का अनुमान है। एक साल पहले यह 17.5 फीसद पर रही थी। आर्थिक गतिविधियों तथा सकल निश्चित निवेश में कमी से कंपनियों की आमदनी प्रभावित होगी।
क्रिसिल ने कहा कि कंपनियों का एबिडटा (ब्याज, कर, मूल्यह्रास और ऋण चुकाने) मार्जिन में सालाना आधार पर एक से डेढ़ प्रतिशत की गिरावट के साथ 19 से 20 प्रतिशत रहने का अनुमान है। हालांकि यह इससे पिछली तिमाही के बराबर ही रहेगा। यह रिपोर्ट 26 प्रमुख क्षेत्रों की 247 बड़ी कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर आधारित है। इसमें बैंक और तेल एवं गैस कंपनियां शामिल नहीं हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आमदनी की वृद्धि दर में गिरावट एयरलाइंस, वाहन कलपुर्जा, वाणिज्यिक वाहन, होटल, धातु, संगठित रिटेल, रीयल एस्टेट और कपड़ा कंपनियों के खराब प्रदर्शन की वजह से आएगी। क्रिसिल रिसर्च के वरिष्ठ निदेशक (उद्योग एवं विशिष्ट शोध) प्रसाद कोपरकर ने कहा, ‘‘वाणिज्यिक वाहन, सीमेंट तथा रीयल एस्टेट कंपनियों के एबिडटा मार्जिन में तिमाही दर तिमाही आधार पर एक से दो प्रतिशत की गिरावट आएगी।’’
रिपोर्ट में कहा गया है कि वहीं दूसरी ओर निर्यात आधारित क्षेत्रों आईटी सेवाओं और फार्मा में तिमाही दर तिमाही आधार पर मार्जिन में अच्छा खासा इजाफा होगा। इसकी वजह तिमाही आधार पर रुपये में 7.4 फीसद की गिरावट है। दूरसंचार क्षेत्र के मार्जिन में मामूली इजाफा होगा। प्रतिस्पर्धा में कमी तथा कंपनियों द्वारा अपनाए गए लागत कटौती उपायों की वजह से दूरसंचार क्षेत्र का मार्जिन थोड़ा बढ़ेगा।
क्रिसिल रिसर्च के अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल ने कहा, ‘‘नीतिगत मोर्चे पर धीमी रफ्तार तथा पूंजी की उंची लागत की वजह से निवेश प्रभावित हुआ है। वहीं दूसरी ओर महंगाई, आर्थिक अनिश्चितता और रिण की ब्याज दरें भी उपभोक्ता की धारणा को प्रभावित कर रही हैं। इससे खपत की वृद्धि दर कम हो रही है।’’