यह ख़बर 28 मई, 2012 को प्रकाशित हुई थी

निजी क्षेत्र में भ्रष्टाचार को दंडनीय अपराध बनाने पर विचार

खास बातें

  • सरकार निजी क्षेत्र में भ्रष्टाचार को दंडनीय अपराध बनाने के कानूनी प्रावधान पर विचार कर रही है जिसमें अपराधी को सात साल तक की सजा का प्रावधान होगा।
नई दिल्ली:

सरकार निजी क्षेत्र में भ्रष्टाचार को दंडनीय अपराध बनाने के कानूनी प्रावधान पर विचार कर रही है जिसमें अपराधी को सात साल तक की सजा का प्रावधान होगा।

सरकार ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में संशोधन करते हुए निजी क्षेत्र में रिश्वतखोरी (रिश्वत लेने व देने दोनों) को आपराधिक जुर्म बनाने का प्रस्ताव किया है।

केंद्र ने भारतीय दंड संहिता (संशोधन) विधेयक, 2011 का मसौदा राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को भेजा है जिसके दायरे में किसी व्यक्ति विशेष, फर्म, सोसायटी, ट्रस्ट, एसोसिएशन, कंपनी द्वारा रिश्वत का मामला भी आएगा। भले ही इस तरह की फर्म, सोसायटी आदि पंजीकृत हो या नहीं।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने निजी क्षेत्र में रिश्वतखोरी को आपराधिक जुर्म बनाने के लिए कानूनों में बदलाव के मुद्दे को सीबीआई तथा राज्यों के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के सम्मेलन में लगभग सात महीने पहले उठाया था।

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इस समय निजी क्षेत्र में रिश्वतखोरी पर नियंत्रण के लिए कोई कानून नहीं है। मसौदा कानून के अनुसार निजी क्षेत्र में किसी भी तरह की रिश्वतखोरी दंडनीय होगी। यानी निजी क्षेत्र में कोई व्यक्ति प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से किसी भी पद के हिसाब से रिश्वतखोरी का कोई भी काम करता है तो वह दंडनीय होगा।