अपने उत्पादन में ‘कबाड’ का इस्तेमाल बढ़ाएं इस्पात विनिर्माता : फग्गन सिंह कुलस्ते

कुलस्ते ने बृहस्पतिवार को भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के इस्पात शिखर सम्मेलन-2022 को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘कॉर्बन उत्सर्जन चिंता का विषय है. इस्पात क्षेत्र को अपने उत्पादन में कबाड़ का इस्तेमाल बढ़ाना चाहिए.''

अपने उत्पादन में ‘कबाड’ का इस्तेमाल बढ़ाएं इस्पात विनिर्माता : फग्गन सिंह कुलस्ते

केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते

नई दिल्ली:

केंद्रीय इस्पात राज्यमंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने घरेलू इस्पात उद्योग को अपने उत्पादन के लिए कबाड़ (स्क्रैप) का इस्तेमाल बढ़ाने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि कॉर्बन उत्सर्जन एक बड़ी चिंता की बात है. ऐसे में इस्पात उत्पादन में कबाड़ का इस्तेमाल बढ़ाने की जरूरत है. कुलस्ते ने बृहस्पतिवार को भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के इस्पात शिखर सम्मेलन-2022 को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘कॉर्बन उत्सर्जन चिंता का विषय है. इस्पात क्षेत्र को अपने उत्पादन में कबाड़ का इस्तेमाल बढ़ाना चाहिए.''

भारत अभी इस्पात विनिर्माण में सालाना तीन करोड़ टन कबाड़ का इस्तेमाल करता है. इसमें से 2.6 करोड़ टन घरेलू कबाड़ होता है और शेष आयात के जरिये आता है. फिलहाल भारत की सालाना इस्पात उत्पादन क्षमता 12 करोड़ टन की है.

मंत्री ने कहा कि उद्योग को कॉर्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए नई पीढ़ी की प्रौद्योगिकी को अपनाना चाहिए. हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि इस्पात विनिर्माता उत्पादन में कितना कबाड़ इस्तेमाल करें.

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मंत्रालय के एक दस्तावेज के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कुल कॉर्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) उत्सर्जन में इस्पात उद्योग का योगदान आठ प्रतिशत का है. वहीं भारत में सालाना आधार पर कुल सीओ2 में इस्पात उद्योग का हिस्सा करीब 12 प्रतिशत है.