यह ख़बर 03 अप्रैल, 2011 को प्रकाशित हुई थी

लक्ष्य से कम रहा कोल इंडिया का उत्पादन

खास बातें

  • कंपनी ने पिछले वित्तवर्ष 2010-11 में 43.13 करोड़ टन कोयले का उत्पादन किया, जबकि संशोधित लक्ष्य 44.02 करोड़ टन था।
New Delhi:

सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कोयला उत्पादक कंपनी कोल इंडिया उत्पादन लक्ष्य से चूक गयी है। कंपनी ने पिछले वित्तवर्ष 2010-11 में 43.13 करोड़ टन कोयले का उत्पादन किया, जबकि संशोधित लक्ष्य 44.02 करोड़ टन था। पर्यावरण संबंधी बाधाओं के कारण कंपनी उत्पादन लक्ष्य हासिल करने में नाकाम रही है। कोल इंडिया लि. (सीआईएल) ने 2010-11 में 46.01 करोड़ टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य रखा था। इसे बाद में वित्तवर्ष समाप्त होने से कुछ दिन पहले संशोधित कर 44.02 करोड़ टन कर दिया गया। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, सीआईएल पिछले वित्तवर्ष में केवल 43.13 करोड़ टन कोयला का उत्पादन कर सका। पर्यावरण मंजूरी में देरी के कारण कंपनी विस्तार परियोजनाओं को क्रियान्वयन नहीं कर सकी। अधिकारी ने नाम नहीं देने की शर्त पर कहा कि परियोजनाओं के विस्तार के जरिये उत्पादन लक्ष्य हासिल किया जाना था, लेकिन वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी प्राप्त करने के कंपनी के बेहतर प्रयासों के बावजूद इसे हासिल नहीं किया जा सका। उल्लेखनीय है कि नवरत्न कंपनी की देश भर में 154 ऐसी परियोनाएं हैं, जिसे पर्यावरण मंजूरी का इंतजार है। ये परियोजनाएं 26,000 हैक्टेयर जमीन पर फैली हैं और इनकी उत्पादन क्षमता 21 करोड़ टन है। सरकार ने कोयला उत्पादन को प्रभावित करने वाले मुद्दों के हल के लिए वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता में 12 सदस्यीय समिति का गठन किया है। मंत्री समूह की अगले महीने फिर बैठक होने वाली है। सीआईएल ने चालू वित्तवर्ष के 45.2 करोड़ टन कोयला उत्पादन का लक्ष्य रखा है।


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