खास बातें
- सार्वजनिक क्षेत्र की कोल इंडिया को इस महीने के अंत तक महारत्न का दर्जा मिलने की संभावना है, जिससे कंपनी को और वित्तीय स्वायत्तता मिल जाएगी।
New Delhi: सार्वजनिक क्षेत्र की कोल इंडिया को इस महीने के अंत तक महारत्न का दर्जा मिलने की संभावना है, जिससे कंपनी को और अधिक वित्तीय स्वायत्तता मिल जाएगी। कोयला खनन करने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी कोल इंडिया ने 2009-10 में 52,000 करोड़ रुपये का कारोबार किया। कोल इंडिया महारत्न का दर्जा प्राप्त करने वाली पांचवीं सरकारी कंपनी होगी। इस समय, चार सरकारी कंपनियों को महारत्न का दर्जा मिला हुआ है और ये कंपनियां हैं- ओएनजीसी, एनटीपीसी, इंडियन आयल और सेल। सार्वजनिक उपक्रम विभाग के सचिव भास्कर चटर्जी ने बताया, कोयला मंत्रालय ने लोक उपक्रम विभाग को प्रस्ताव भेजा है। उन्होंने कहा कि कोल इंडिया महारत्न का दर्जा प्राप्त करने के लिए सभी आवश्यक मानकों को पूरा करती है। विभाग को चालू वित्तवर्ष के अंत से पहले यह काम (दर्जा दिए जाने और औपचारिक आदेश जारी करने) पूरा होने की उम्मीद है। महारत्न का दर्जा प्राप्त करने के लिए तय मानकों के मुताबिक, एक कंपनी का पिछले तीन साल के दौरान सालाना शुद्ध लाभ 5,000 करोड़ रुपये से अधिक होना चाहिए, उसका नेटवर्थ 15,000 करोड़ रुपये से अधिक होना चाहिए और उसका कारोबार 25,000 करोड़ रुपये से अधिक होना चाहिए। इसके अलावा कंपनी शेयर बाजार में सूचीबद्ध हो।