खास बातें
- इस बार होली में चीनी पिचकारी, बैलूनों, रंगों और अन्य सामग्रियों से दिल्ली का बाजार पट चुका है। इनमें से कई उत्पादों की गुणवत्ता अच्छी नहीं है।
नई दिल्ली: इस बार होली में चीनी पिचकारी, बैलूनों, रंगों और अन्य सामग्रियों से दिल्ली का बाजार पट चुका है। कारोबार जगत की प्रतिनिधि संस्था एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) ने सोमवार को यह जानकारी दी और कहा कि इनमें से कई उत्पादों की गुणवत्ता अच्छी नहीं है।
एसोचैम के एक विश्लेषण के मुताबिक दिल्ली में होली से सम्बंधित उत्पादों में से 85 फीसदी चीन से आयातित माल है।
विश्लेषण जारी करते हुए एसोचैम महासचिव डीएस रावत ने कहा, "अधिकतर उत्पाद घटिया स्तर के हैं लेकिन अपने लुभावने डिजाइनों के कारण युवाओं में काफी लोकप्रिय हैं।"
होली को तीन दिन रह गए हैं और चीन आयातित वाटर गन, बजूका, पिचकारी, जैसे उत्पाद खूब बिक रहे हैं।
इस विश्लेषण पर पहुंचने से पहले एसोचैम के प्रतिनिधियों ने सदर बाजार तथा खारी बावली के थोक बाजार तथा करोल बाग, शहादरा, रोहिणी तथा लाजपत नगर के खुदरा बाजारों में करीब 50 दुकानदारों से बात की।
अधिकतर दुकानदारों ने कहा कि चीनी उत्पादों की काफी बिक्री हो रही है। इसी बीच पारम्परिक इस्पात तथा कांसे के पिचकारी की बिक्री में गिरावट हो रही है।
लाजपत नगर बाजार के एक दुकानदार रमेश शर्मा ने कहा, "चीनी उत्पाद बिक्री में देशी उत्पादों को पीछे छोड़ रहे हैं।"
एसोचैम ने कहा कि होली के रंग और सम्बंधित उत्पादों का बाजार हर साल 20 फीसदी की चक्रवृद्धि दर से बढ़ रहा है।