यह ख़बर 30 सितंबर, 2013 को प्रकाशित हुई थी

चिदंबरम ने वित्तीय बाजार की अनियमित कंपनियों को लताड़ा

खास बातें

  • वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने वित्तीय बाजार में नियमों के दायरे से बहार रह कर काम कर रही इकाइयों की सोमवार को आलोचना की और कहा कि उनकी गतिविधियों से भारी संख्या में उपभोक्ता प्रभावित हुए हैं।
चेन्नई:

वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने वित्तीय बाजार में नियमों के दायरे से बहार रह कर काम कर रही इकाइयों की सोमवार को आलोचना की और कहा कि उनकी गतिविधियों से भारी संख्या में उपभोक्ता प्रभावित हुए हैं।

चिदंबरम ने यहां एक गोष्ठी में कहा कि वित्तीय क्षेत्र की अपनी गति और अपना उत्साह होता है। इसमें कुछ ऐसे नए क्षेत्र उत्पन्न होते हैं। कई बार ऐसे क्षेत्र अविनियमित रहते हैं और बाजार में ऐसे अविनियमित क्षेत्रों में अतिनियंत्रित रप से काम करने वाली इकाइयों को खेलने का मौका मिल जाता है।

चिदंबरम ने कहा ‘ऐसे अनियंत्रित खिलाड़ी धुंधलके में अपनी चाल चलते हैं। इससे बाजार का अनुशासन खतरे में पड़ता है और व्यवस्थागत में अस्थिरता पैदा होती है। इन गतिविधियों से बड़ी संख्या में उपभोक्ता प्रभावित होते हैं और व्यवस्था में उनका विश्वास घटता है।’

वह इंस्टीच्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया द्वारा एक राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। इसका विषय ‘भारतीय वित्तीय संहिता’ था। वित्तीय कानून सुधार आयोग (एफएसएलआरसी) ने नई ‘भारतीय वित्तीय संहिता’ लागू किए जाने की सिफारिश की है।

उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में निवेशक विशेष तौर पर छोटे निवेशक वित्तीय प्रणाली से दूर रहते हैं। इससे ‘अर्थवयवस्था रपी शरीर में रक्त का संचार कम हो जाता है। वित्तीय उपभोक्ता है। एक वित्तीय उपभोक्ता विनियमित बाजार में अपने को सहज पाता है।’

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उन्होंने कहा कि वित्तीय क्षेत्र के अनियंत्रित इंजीनियर विनियामकीय व्यवस्था की सीमा को पहचान कर उसका फायदा उठाने के लिए नियमों की सीमा के बार की योजनाएं लेकर उतर जाते हैं और उपभोक्ताओं को नियम कायदे की सुरक्षा से सुरक्षा से वंचित रखते हैं।