खास बातें
- राज्यों की पॉवर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों को कर्ज से उबारने के लिए सरकार ने जो नई योजना तैयार की है उसका एक अहम हिस्सा राज्य स्तर पर बिजली की दरों में हर साल बढ़ोतरी करना है।
नई दिल्ली: राज्यों की पॉवर डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों को कर्ज से उबारने के लिए सरकार ने जो नई योजना तैयार की है उसका एक अहम हिस्सा राज्य स्तर पर बिजली की दरों में हर साल बढ़ोतरी करना है।
कैबिनेट के फैसले पर सफाई देते हुए बिजली मंत्री वीरप्पा मोइली ने इशारों-इशारों में यह बात कह दी। उन्होंने कहा, 'हमें हर साल टैरिफ तय करना होगा। कई राज्य सरकारों ने सालों से बिजली दरों में बदलाव नहीं किया है। इस वजह से उनका घाटा बढ़ता जाता है। वह अपना कर्ज समय पर नहीं चुका पाते, अगर बैंक आपको कर्ज नहीं देंगे तो आप बिजली खरीदेंगे कैसे और बिजली ग्राहकों तक कैसे पहुंचाएंगे।'
बिजली मंत्री ने यह भी दलील दी कि बिजली दरों में हर साल बदलाव के प्रस्ताव को आम लोग स्वीकार कर लेंगे। आपको कीमतें हर साल बढ़ानी होंगी। लोग भुगतान करेंगे, वो इसकी वजह समझेंगे।
वैसे वीरप्पा मोइली किसानों को दी जा रही सस्ती बिजली की व्यवस्था को जारी रखने के पक्ष में हैं। बरसों से राज्यों की डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों की खस्ता वित्तीय हालत पर सवाल उठते रहे हैं। अब सरकार ने बेल आउट पैकेज के जरिये इन कंपनियों पर कर्ज का बोझ कम करने के लिए यह प्रस्ताव तैयार किया है। ये नई पहल कितनी सफल होगी यह इस बात पर निर्भर करेगा कि राज्य सरकारें हर साल बिजली की दरें बढ़ाने के लिए तैयार होंगी या नहीं।