यह ख़बर 25 फ़रवरी, 2011 को प्रकाशित हुई थी

2-जी मामले में सीबीआई के समक्ष पेश हुए शौरी

खास बातें

  • पूर्व दूरसंचार मंत्री अरुण शौरी 2-जी स्पेक्ट्रम के सिलसिले में शुक्रवार को सीबीआई के समक्ष उपस्थित हुए।
New Delhi:

पूर्व दूरसंचार मंत्री अरुण शौरी 2-जी स्पेक्ट्रम के सिलसिले में शुक्रवार को सीबीआई के समक्ष उपस्थित हुए और कहा कि वास्तविक मुद्दा रिश्वतखोरी का है न कि स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए अपनाई गई नीति का। सीबीआई मुख्यालय में जाने से पहले उन्होंने कहा कि सरकार बेतुका तर्क देकर वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहती है। वाजपेयी सरकार में दूरसंचार मंत्री रहे शौरी ने कहा कि वह सीबीआई की हरसंभव मदद करेंगे और 50 पन्नों का दस्तावेज सौंपेंगे, जिसमें 'पहले आओ-पहले पाओ' जैसी नीतियों पर विस्तृत सवालों का जवाब होगा। उन्होंने कहा, यह काफी मजेदार बिंदु (पहले आओ-पहले पाओ का आधार) है। यह जनता की आंखों में धूल झोंकना है। मुद्दा यह है कि ए राजा ने धन बनाया, भले ही यह पहले आओ-पहले पाओ की नीति हो या नहीं, इसलिए उन्हें मंत्रिमंडल से हटाया गया। उन्हें जेल में रखा गया। उन्होंने कहा, मुद्दा स्पेक्ट्रम के आवंटन से धन बनाने का है। ज्यादा महत्वपूर्ण था कि उनके (राजा के) पर्यवेक्षकों ने भी ध्यान नहीं दिया। वे सो रहे थे। यह मुद्दा है। शौरी ने कहा, इस मुद्दे से ध्यान भटकाने के लिए सरकार पहले आओ-पहले पाओ का तर्क दे रही है। 2001 से दूरसंचार नीति में संभावित आपराधिक पहलुओं की जांच के सिलसिले में पूछताछ के लिए शौरी सीबीआई के समक्ष उपस्थित हुए।


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