यह ख़बर 12 अक्टूबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

केजी-डी6 मामले में सतर्क रहे पेट्रोलियम मंत्रालय : कैग

खास बातें

  • कैग ने कहा है कि केजी-डी6 की लेखापरीक्षा पूरी होने के बाद ही मंत्रालय को रिलायंस इंडस्ट्रीज को व्यय वसूली की अनुमति देनी चाहिए।
नई दिल्ली:

कैग ने रिलायंस के केजी बेसिन क्षेत्र के मामले में पेट्रोलियम मंत्रालय को सतर्क रहने की सलाह दी है। कैग ने कहा है कि केजी-डी6 की लेखापरीक्षा पूरी होने के बाद ही मंत्रालय को रिलायंस इंडस्ट्रीज को व्यय वसूली की अनुमति देनी चाहिए। उप महानियंत्रक एवं लेखा परीक्षक रेखा गुप्ता ने मंत्रालय को महानियंत्रक एवं लेखा परीक्षक (कैग) द्वारा लिखे गये पत्र का जिक्र करते हुए कहा कि यह पत्र इस महत्वपूर्ण मुद्दे के प्रति सतर्क करने के लिए था ताकि मामले में उपयुक्त एहतियाती कार्रवाई की जा सके। कैग की केजी डी6 पर रिपोर्ट पिछले महीने संसद में पेश की गई थी, उसी रिपोर्ट का सारांश करते हुये मंत्रालय को पत्र भेजा गया। पत्र में मंत्रालय से उस फैसले की समीक्षा करने के लिए कहा गया जिसमें आरआईएल को 2001 में धीरूभाई-1 और 3 में गैस मिलने के बाद बंगाल की खाड़ी में केजी-डी6 ब्लाक में 7,645 वर्गकिलोमीटर का पूरा दायरा अपने पास रखने की इजाजत दी गई थी। इसके अलावा 10 अनुबंधों की समीक्षा करने के लिए कहा गया है जिनमें से आठ ऐकर ग्रुप को इसी ब्लाक के एमए तेल क्षेत्र में एकल बोली के आधार पर दिया गया।


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