यह ख़बर 08 सितंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

कैग ने की पेट्रोलियम मंत्रालय, डीजीएच की खिंचाई

खास बातें

  • नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक ने कृष्णा गोदावरी बेसिन में पूरा का पूरा डी6 ब्लॉक रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास छोड़ने के लिए मंत्रालय की खिंचाई की है।
New Delhi:

नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) ने कृष्णा गोदावरी बेसिन में पूरा का पूरा डी6 ब्लॉक रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास छोड़ने के लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की खिंचाई की है और कहा है कि यह कंपनी के साथ उत्पादन में हिस्सेदारी के अनुबंध के विरुद्ध है। हालांकि, कैग ने संसद में गुरुवार को पेश अपनी बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट में केजी बेसिन के डी6 ब्लॉक के विकास पर होने वाले खर्च के बारे में कहा है कि अनुमानित खर्च को मंजूरी देने का अर्थ यह नहीं है कि परियोजना की वास्तविक लागत पर मुहर लगा दी गई है। ऑडिट एजेंसी ने कहा है कि पक्की मंजूरी वास्तविक लागत की ऑडिट के बाद ही दी जा सकती है। माना जा रहा है कि इससे परियोजना लागत संबंधी आलोचनाओं से कंपनी को कुछ राहत मिली है। कच्चे तेल के क्षेत्र में विभिन्न कंपनियों और सरकार के बीच किए गए उत्पादन भागीदारी अनुबंध (पीएससी) के कार्यप्रदर्शन पर तैयार कैग की इस रिपोर्ट में केजी बेसिन के डी6 ब्लॉक पर रिलायंस द्वारा किए गए खर्च को 2004 में प्रस्तावित 2.4 अरब डॉलर से बढ़ाकर 2006 में 8.8 अरब डॉलर कर दिए जाने पर कोई टिप्पणी नहीं की गई है। रिपोर्ट में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा उसके तकनीकी प्रकोष्ठ हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (डीजीएच) के इस इस निर्णय पर आपत्ति खड़ी की, जिसके तहत उसने रिलायंस इंडस्ट्रीज को बंगाल की खाड़ी स्थित डीडब्ल्यूएन.98.3 यानी केजी.डी6 ब्लॉक के पूरे 7,645 वर्गकिलोमीटर क्षेत्र को कंपनी के हवाले रहने दिया। रिलायंस ने 2001 में इस क्षेत्र में धीरुभाई एक और धीरुभाई 3 में गैस खोज ली थी। कैग की राय में उत्पादन में हिस्सेदारी के अनुबंध के तहत ज्ञात तेल गैस के स्रोत वाले क्षेत्रों को छोड़ रिलायंस को ब्लॉक का एक चौथाई हिस्सा लौटा छोड़ देना चाहिए था।


Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com