खास बातें
- नागर विमानन मंत्री अजित सिंह ने गुरुवार को कहा कि कैबिनेट ने एयर इंडिया की कायाकल्प और पुनर्गठन योजनाओं को मंजूरी दे दी है।
नई दिल्ली: वित्तीय संकट से जूझ रही एयर इंडिया को बड़ी राहत देते हुए सरकार ने गुरुवार को एक कायाकल्प योजना को मंजूरी दी ताकि इस विमानन कंपनी के परिचालन और वित्तीय स्थिति को ठीक किया जा सके। इस सहायता में अतिरिक्त पूंजी डालना भी शामिल है।
नागर विमानन मंत्री अजित सिंह ने आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा ‘‘एयर इंडिया की कायाकल्प योजना को मंजूर कर लिया गया है।’’ सीसीईए ने कायाकल्प योजना (टैप) और विमानन कंपनी की वित्तीय पुनर्गठन योजना (एफआरपी) को मंजूर कर लिया है जिसमें सरकार द्वारा अतिरिक्त इक्विटी डाला जाना शामिल है।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इसके अलावा सीसीईए ने बहुप्रतीक्षित बोइंग ड्रीमलाईनर - 787 को शामिल करने को भी हरी झंडी दे दी। उन्होंने बताया कि विदेशी विमानन कंपनियों को भारतीय विमानन कंपनियों में निवेश की मंजूरी के मामले पर मंत्रिमंडल की अगले सप्ताह होने वाली बैठक में विचार किया जा सकता है।
विमानन कंपनी पुनर्गठन योजना के तहत सरकार ने आम बजट 2012-13 में चालू वित्त वर्ष के दौरान 4,000 करोड़ रुपये की सहायता की घोषणा की थी। इससे विमानन कंपनी का इक्विटी आधार बढ़कर 7,345 करोड़ रुपये हो जाएगा।
अमेरिकी विमान विनिर्माता बोइंग को 2005 में जिन विमानों के लिए आर्डर दिया गया था उनमें से 27 ड्रीमलाइनर की आपूर्ति एयरइंडिया को अगले महीने होने की उम्मीद है। शुरुआत में इन विमानों की आपूर्ति 2009 से शुरू होनी थी लेकिन अमेरिकी विमान निर्माता ने इसे कई वजहों से टाल दिया था।
एसबीआई नेतृत्व वाले 19 बैंको के कंसोर्टियम ने पिछले महीने एफआरपी को मंजूरी दी जिनमें बैंकों द्वारा 18,000 करोड़ रुपये का ऋण पुनर्गठन और सरकार द्वारा इक्विटी डालना शमिल है।
एफआरपी से एयर इंडिया को कार्यपंजी से जुड़े रिण पर ब्याज देनदारी में राहत मिलेगी। इसके तहत ब्याज परिव्यय में उल्लेखनीय कमी की जाएगी और इसकी परिचालन क्षमता बढ़ाने और कायाकल्प योजना में सुधार के लिए जरुरी समय दिया जाएगा।
इस वित्तीय पुनर्गठन योजना के तहत एयर इंडिया ने 31 मार्च को बैंको के कंसोर्टियम के साथ चार समझौतों - मास्टर पुनर्गठन समझौता, कार्य पूंजी सहायता समझौता, सुविधा प्रदान करने वाले एजेंट की नियुक्ति से जुड़ा समझौता और न्यासी नियुक्ति समझौता - पर हस्ताक्षर किया गया था।
इन समझौतों के मुख्य बिंदुओं में एयर इंडिया की 10,500 करोड़ रुपये की कार्यपूंजी को दीर्घकालिक ऋण में तब्दील करना शामिल है जिस पर सालाना 11 फीसदी की दर से ब्याज देय होगा।
सूत्रों ने बताया इसके अलावा सरकार की गारंटी वाले 7,400 करोड़ रुपये के गैर परिवर्तनीय डिबेंचर (एनसीडी) जारी किए जाएंगे और निवेशक इसे खरीदेंगे। एनसीडी से हुई आय का उपयोग ऋणदाताओं को भुगतान करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा करीब 3,500 करोड़ रुपये की कार्यपूंजी के कुछ हिस्से को नकद ऋण व्यवस्था में तब्दील किया जाएगा।