खास बातें
- मुद्रास्फीति में तेजी और पश्चिम एशिया में राजनीतिक संकट से बाजार में जारी गिरावट पर बजट से कुछ विराम लगने और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
New Delhi: मुद्रास्फीति में तेजी और पश्चिम एशिया में राजनीतिक संकट के कारण बाजार में जारी गिरावट पर वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी के बजट से कुछ विराम लगने और मजबूती मिलने की उम्मीद है। वित्तमंत्री सोमवार को 2011-12 का आम बजट पेश करने वाले हैं। लीबिया के संकट के साथ कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण 26 फरवरी को समाप्त सप्ताह में बंबई शेयर बाजार के सेंसेक्स में 2.8 प्रतिशत अथवा 510 अंकों की गिरावट आई। गुरुवार को सेंसेक्स में करीब 545.92 अंक की गिरावट आई, जो अगस्त, 2009 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है। बाजार पर्यवेक्षकों का मानना है कि शुक्रवार को घोषित आर्थिक समीक्षा और रेल बजट 2011-12 शेयर बाजार के लिए कोई खास नहीं साबित हुए। अब बाजार को आम बजट से उम्मीद है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि सरकार को ऐसा संतुलित बजट पेश करना चाहिए, जिससे राजस्व को बढ़ाकर और खर्चे को कम कर राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.8 प्रतिशत के स्तर पर रखने के लक्ष्य को हासिल किया जा सके। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशल सर्विसेज के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक मोतीलाल ओसवाल ने कहा, जहां तक शेयर बाजार की आगे की दिशा का सवाल है, इस बात की पूरी संभावना है कि बजट आगे के खेल की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है। बाजार में फिलहाल गिरावट का रुख है और इस रुख को केंद्रीय बजट बदल सकता है। विशेषज्ञों ने कहा कि आम तौर पर बजट के पहले बड़ी घोषणाओं की उम्मीद में बाजार में तेजी आती है और बजट के बाद निराशा हाथ लगती है, क्योंकि वित्त विधेयक में जो कुछ भी बाजार चाहता है, वह सरकार दे नहीं पाती है। इस बार बाजार की अपेक्षाएं कम हैं, इसलिए बजट में यदि कोई तार्किक उपाय किए जाते हैं, तो बाजार की प्रतिक्रिया सकारात्मक भी हो सकती है। चालू वर्ष में अभी तक शेयर बाजार में 13.69 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है और विशेषज्ञों का मानना है कि बजट के बाद बाजार के प्रदर्शन में सुधार हो सकता है, बशर्ते कि वित्तपोषण के संदर्भ में बाधाएं तथा क्षेत्रीय मोर्चे पर कार्यान्वयन के संदर्भ में रुकावटें कम हों।