यह ख़बर 13 जनवरी, 2012 को प्रकाशित हुई थी

लड़खड़ाती बीएसएनएल, एचएमटी खो सकती हैं 'मिनी रत्न' का दर्जा

खास बातें

  • बीएसएनएल, एचएमटी, हिंदुस्तान पेपर और हिंदुस्तान न्यूजपिंट्र जैसी कई सरकारी कंपनियां 'मिनी रत्न' का दर्जा खो सकती हैं।
नई दिल्ली:

बीएसएनएल, एचएमटी, हिंदुस्तान पेपर और हिंदुस्तान न्यूजपिंट्र जैसी कई सरकारी कंपनियां 'मिनी रत्न' का दर्जा खो सकती हैं क्योंकि वे निष्पादन के पैमाने पर नीचे आ गई हैं जो उनकी स्वायत्ता से जुड़ी इस स्थिति को बरकरार रखने के लिए जरूरी है।

सख्त रवैया अख्तियार करते हुए सार्वजनिक उपक्रम विभाग ने सभी संबद्ध मंत्रालयों को निर्देश दिया कि वह अपने तहत आने वाले सरकारी उपक्रमों के मौजूदा मिनी रत्न दर्जे का पुनर्परीक्षण करें।

सार्वजनिक उपक्रम विभाग के मानदंडों के मुताबिक मिनीरत्न सार्वजनिक उपक्रमों के लिए लगातार तीन साल तक मुनाफा कमाना और सकारात्मक निवल मूल्य जरूरी है।

सोमवार से पहले उन मंत्रालयों और विभागों से व्यापक रिपोर्ट मांगी गई जिनका सार्वजनिक उपक्रमों पर प्रशासनिक नियंत्रण है।

मिनी रत्न कंपनियों की संख्या 67 है जिनमें बीएसएनएल, हिंदुस्तान पेपर कापरेरेशन और हिंदुस्तान न्यूजप्रिंट शामिल हैं जो वित्तीय मुश्किल के दौर से गुजर रही हैं और उन्हें नुकसान हो रहा है। वे मिनी रत्न का दर्जा खो सकती हैं। इस दर्जे के कारण उन्हें बिना सरकारी मंजूरी के 500 करोड़ रुपये तक के निवेश का अधिकार है।

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सार्वजनिक उपक्रम विभाग के निर्देश में कहा गया है कि मिनीरत्न के लिए तय मानदंड का पालन न होने की स्थिति में इस दर्जें को तुरंत खत्म करने का आदेश पारित हो सकता है।