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खास बातें
- केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने विदेशों में पड़ा काला धन वापस लाने के लिए सरकार की रणनीतियों पर सोमवार को लोकसभा में श्वेत पत्र पेश किया, लेकिन इसमें धन का ब्यौरा नहीं है।
नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने विदेशों में पड़ा काला धन वापस लाने के लिए सरकार की रणनीतियों पर सोमवार को लोकसभा में श्वेत पत्र पेश किया, लेकिन इसमें धन का ब्यौरा नहीं है। पत्र में हालांकि लोकपाल और लोकायुक्त जैसी संस्थाओं के गठन पर जोर दिया गया है।
श्वेत पत्र में धन का ब्यौरा न देने की वजह इसका कोई एक आंकड़ा और इसके बारे में पता लगाने के लिए कोई सर्वमान्य विधि का नहीं होना बताया गया है। पत्र में कहा गया है, "काले धन को लेकर कोई विश्वसनीय आंकड़ा नहीं है और न ही इसका पता लगाने के लिए कोई सर्वमान्य प्रविधि है। अब तक जो भी आकलन आए हैं, सभी अलग-अलग तरह के हैं।"
श्वेत पत्र में कहा गया है कि आम धारणा यह है कि भारतीयों की एक बड़ी रकम स्विस बैंकों में जमा है। एक आकलन के अनुसार, वर्ष 2006 से 2010 के बीच स्विस बैंकों में भारतीयों के धन जमा करने के मामलों में कमी आई है। वर्ष 2006 में जहां यह 23,373 करोड़ रुपये था, वहीं 2010 में यह 9,295 करोड़ रुपये रिकॉर्ड किया गया।
श्वेत पत्र में काले धन की मात्रा का पता लगाने के लिए गठित समिति की रिपोर्ट भी शामिल नहीं की गई है।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने विदेशों में पड़े काले धन की मात्रा का पता लगाने के लिए सरकार ने एक अध्ययन शुरू किया है।
यह अध्ययन तीन अलग-अलग सरकारी संस्थाएं- द नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी, द नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंशियल मैनेजमेंट और नेशल काउंसिल फॉर अप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च कर रही हैं।