यह ख़बर 12 अप्रैल, 2012 को प्रकाशित हुई थी

आपत्तिजनक सामग्री मामले में गूगल, यू-ट्यूब को राहत

खास बातें

  • दिल्ली की एक अदालत ने वेबसाइट गूगल एवं यूट्यूब का नाम उस सूची से हटाने की अनुमति दे दी जिस सूची में उन वेबसाइटों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है।
नई दिल्ली:

दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को वेबसाइट गूगल एवं यूट्यूब का नाम उस सूची से हटाने की अनुमति दे दी जिस सूची में उन वेबसाइटों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है, जिन्होंने अपनी वेबसाइट पर कथित रूप से आपत्तिजनक सामग्री डाली है।

प्रशासनिक दीवानी न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने याचिकाकर्ता मुफ्ती एजाज अरशद कासमी के वकील संतोष पांडे की दलील सुनने के बाद यह आदेश पारित किया। पांडे ने अदालत को बताया कि उनके द्वारा सौंपी गई सूची से अपने नाम हटाने की दोनों कम्पनियों की याचिका पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। गूगल इंडिया एवं यूट्यूब ने अदालत को बताया कि वे सॉफ्टवेयर आधारित कम्पनियां हैं और अपनी वेबसाइटों पर सामग्री डालने में उनकी कोई भूमिका नहीं है।

इस बीच, कासमी ने वेबसाइटों की एक संशोधित सूची अदालत में सौंपी और उन पर कानूनी कार्रवाई शुरू करने की मांग की। इस सूची में छह नई वेबसाइटों-फेसबुक इंडिया, फेसबुक इंक, गूगल इंक, आरकुट, यूट्यूब इंक और ब्लॉगस्पाट को शामिल किया गया है। अदालत मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल को करेगी। याचिकाकर्ता ने सूची में जोम्बी टाइम, एक्जबोई, बोर्डरीडर, आईएमसी इंडिया, माई लॉट, शाइनी ब्लॉग और टॉपिक्स को शामिल नहीं किया है।

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अदालत ने इसके पहले याहू इंडिया, याहू इंक और माइक्रोसॉप्ट इंडिया को अपने नाम सूची से बाहर करने की अपील स्वीकार की थी। उल्लेखनीय है कि इस्लामिक पीस फाउंडेशन आफ इंडिया द्वारा संचालित एक वेबसाइट से जुड़े इस्लामी अनुसंधानकर्ता कासमी ने करीब 20 वेबसाइटों से आपत्तिजनक सामग्री हटाए जाने की मांग की है।