यह ख़बर 11 मार्च, 2012 को प्रकाशित हुई थी

कपास निर्यात पर पाबंदी हटाने का फैसला

खास बातें

  • घरेलू खपत बढ़ने के बाद आपूर्ति घटने की आशंका से सरकार ने पांच मार्च को कपास के निर्यात पर पाबंदी लगा दी थी।
नई दिल्ली:

कपास निर्यात पर पाबंदी के व्यापाक विरोध के बाद सरकार ने रविवार को पाबंदी हटाने का फैसला किया। घरेलू खपत बढ़ने के बाद आपूर्ति घटने की आशंका से सरकार ने पांच मार्च को कपास के निर्यात पर पाबंदी लगा दी थी।

केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने रविवार को पाबंदी हटाने के फैसले की घोषणा की। भारत कपास का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।

शर्मा ने कहा, "किसानों, व्यापारियों और उद्योगपतियों के हितों को देखते हुए पाबंदी हटाने का एक संतुलित फैसला लिया गया।"

मंत्रालय के मुताबिक कपास सत्र 2010-11 में कपास के अधिक निर्यात के कारण 2011-12 के लिए कपास का भंडार 33 लाख गांठ रह गया था, जो कपास सलाहकार बोर्ड के 48.30 लाख गांठ के अनुमान से कम था।

इस वर्ष हालांकि कपास का उत्पादन पिछले साल के समान ही था।

कपास निर्यात पर पाबंदी की किसान और व्यापरी समुदाय के साथ चीन के कपास उद्योग ने भी आलोचना की थी।

इससे पहले पांच मार्च को केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने कहा था कि घरेलू खपत के रुझानों और आपूर्ति में गिरावट को देखते हुए निर्यात पर रोक लगाई गई है।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि आपूर्ति 2009-10 के उत्पादन स्तर से कम है और भंडार में भी अपेक्षित स्तर से कमी आई है।

मंत्रालय ने कहा था कि 84 लाख गांठ के अनुमानित निर्यात की जगह 94 लाख गांठ का निर्यात किया जा चुका है।

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घरेलू बाजार में इस समय कपास की कीमत 34 हजार रुपये से 35 हजार रुपये प्रति कैंडी (356 किलो) है।