यह ख़बर 22 जनवरी, 2012 को प्रकाशित हुई थी

3जी रोमिंग मामले में दूरसंचार कंपनियों ने कैविएट दायर

खास बातें

  • टीडीसैट में अपील खारिज होने के बाद सरकार की तरफ से मामले को आगे चुनौती देने की आशंका के बीच निजी क्षेत्र की दूरसंचार कंपनियों ने उच्च न्यायालय के साथ-साथ उच्चतम न्यायालय में कैविएट दाखिल कर दिए।
नई दिल्ली:

टीडीसैट में अपील खारिज होने के बाद सरकार की तरफ से मामले को आगे चुनौती देने की आशंका के बीच निजी क्षेत्र की दूरसंचार कंपनियों ने उच्च न्यायालय के साथ-साथ उच्चतम न्यायालय में कैविएट दाखिल कर दिए।

उन्हें इस बात की आशंका है कि सरकार दूरसंचार विवाद निपटान अपीलीय न्यायाधिकरण :टीडीसैट: में अपनी अपील खारिज होने के बाद आगे अदालत में अपील कर सकती है। सरकार ने कहा था कि टीडीसैट के पास अंतर सर्कल में 3जी रोमिंग समझौतों के मुद्दों पर निर्णय का अधिकार नहीं है। टीडीसैट ने सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया।

कैविएट दाखिल करने के बाद कंपनियों ने यह सुनिश्चित किया है कि अदालत दूरसंचार विभाग की याचिका पर बिना उनका पक्ष सुने एक तरफा निर्णय नहीं देगा।

सरकार ने टीडीसैट के क्षेत्राधिकार पर सवाल खड़ा किया। न्यायाधिकरण ने इस मामले में 24 दिसंबर को दूरसंचार कंपनियों की याचिका पर सुनवाई कर उन्हें बड़ी राहत दी और दूरसंचार विभाग पर कंपनियों के खिलाफ कोई कार्रवाई करने से रोक लगा दी थी। सरकार ने पांच दूरसंचार कंपनियों से 24 घंटे के भीतर 3जी पर अंतर सर्कल रोमिंग रोकने को कहा था।

कंपनियों ने सरकार के इस आदेश को टीडीसैट के समक्ष चुनौती दी थी। जिन कंपनियों ने चुनौती दी थी, उनमें भारती एयरटेल, वोडाफोन एस्सार, आइडिया सेल्युलर, एयरसेल तथा टाटा टेलीसर्विसेज शामिल हैं।

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इस कदम की पुष्टि करते हुए कंपनियों का प्रतिनिधित्व कर रहे एक अधिवक्ता ने प्रेट्र से कहा कि इस तरह की संभावनायें है कि इस मामले में सरकार उच्च न्यायालय में जा सकती है, क्योंकि उच्च न्यायालय पहले ही इस तरह की एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है। टीडीसैट ने 20 जनवरी को दूरसंचार विभाग की उस याचिका को खारिज कर दिया थी जिसमें 3जी रोमिंग समझौता मामले में उसके क्षेत्राधिकार को लेकर सवाल उठाये गये थे।