यह ख़बर 22 अक्टूबर, 2012 को प्रकाशित हुई थी

मौद्रिक नीति के जरिये मांग पर अंकुश लगाना घातक : एसोचैम

खास बातें

  • उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा कि रिजर्व बैंक को मुद्रास्फीति नियंत्रित करने के लिए हमेशा मौद्रिक नीति का उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि मांग पर अंकुश आर्थिक वृद्धि के लिए ‘घातक’ है।
नई दिल्ली:

उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा कि रिजर्व बैंक को मुद्रास्फीति नियंत्रित करने के लिए हमेशा मौद्रिक नीति का उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि मांग पर अंकुश आर्थिक वृद्धि के लिए ‘घातक’ है।

एसोचैम के एक अध्ययन के अनुसार, 200 प्रतिभागियों में से बहुसंख्यक लोगों ने कहा कि मुद्रास्फीति नियंत्रित करने के लिए रिजर्व बैंक द्वारा हमेशा मौद्रिक साधनों का उपयोग करना सही नहीं है।

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उद्योगमंडल ने बयान में कहा, कीमत वृद्धि हमेशा मांग पर अंकुश लगाकर नियंत्रित नहीं की जानी चाहिए। यह आर्थिक वृद्धि के लिए आत्मघाती होगा। सितंबर महीने में मुद्रास्फीति बढ़कर 7.81 प्रतिशत हो गई जो 10 महीने का उच्च स्तर है। इससे पूर्व महीने में यह 7.55 प्रतिशत थी। रिजर्व बैंक दूसरी तिमाही की मौद्रिक नीति समीक्षा 30 अक्तूबर को करने वाला है।